
Irregular Periods Symptoms: पीरियड्स हर महिला के शरीर का एक प्राकृतिक हिस्सा हैं, लेकिन जब उनकी तारीख आगे-पीछे होने लगती है तो चिंता होना स्वाभाविक है। कई महिलाएं सोचती हैं कि एक-दो हफ्ते की देरी सामान्य है, जबकि कुछ लोग हर महीने अलग-अलग तारीख पर पीरियड्स आने को भी नजरअंदाज कर देती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कितना गैप होने पर पीरियड्स को इर्रेगुलर माना जाता है?
यूके की स्वास्थ्य सेवा संस्था NHS (National Health Service) के अनुसार, अगर आपके पीरियड्स हर महीने एक जैसे अंतराल पर नहीं आते, कभी जल्दी आ जाते हैं और कभी बहुत देर से आते हैं, तो उन्हें इर्रेगुलर पीरियड्स माना जा सकता है। सरल शब्दों में कहें तो अगर आपके मासिक चक्र की लंबाई हर बार काफी बदल रही है, तो यह शरीर का एक संकेत हो सकता है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अधिकांश महिलाओं में पीरियड साइकिल 21 से 35 दिनों के बीच होती है। हालांकि हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए कुछ अंतर सामान्य माना जाता है। लेकिन यदि कभी 25 दिन में पीरियड्स आ रहे हैं और अगले महीने 45 या 50 दिन बाद, तो इसे नियमित चक्र नहीं माना जाएगा। NHS के मुताबिक, अगर पीरियड्स बार-बार मिस हो रहे हैं, महीनों तक नहीं आते या उनके बीच का अंतराल लगातार बदलता रहता है, तो इसकी वजह जानना जरूरी है।
पीरियड्स में गड़बड़ी सिर्फ हार्मोनल बदलावों की वजह से नहीं होती। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे:
कई बार पीरियड्स शरीर का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड भी साबित होते हैं। यानी अगर मासिक चक्र में लगातार बदलाव दिख रहा है, तो यह शरीर में चल रही किसी दूसरी समस्या का संकेत हो सकता है।
अगर पीरियड्स अचानक बहुत अनियमित हो जाएं। तीन महीने या उससे अधिक समय तक पीरियड्स न आएं और बहुत ज्यादा या बहुत कम ब्लीडिंग हो साथ ही पीरियड्स के बीच में बार-बार ब्लीडिंग हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
कई महिलाएं पीरियड्स की तारीख को सिर्फ प्रेग्नेंसी से जोड़कर देखती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि मासिक चक्र महिलाओं की समग्र सेहत के बारे में भी काफी कुछ बताता है। इसलिए अगर आपके पीरियड्स का पैटर्न लगातार बदल रहा है, तो उसे सामान्य मानकर टालना सही नहीं होगा। अपने पीरियड्स को ट्रैक करना एक अच्छी आदत है। इससे आप समय रहते बदलावों को पहचान सकती हैं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह ले सकती हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।