
Ebola Virus Spread In Air or Not: कांगो में इबोला वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह आंकड़ा 1000 पहुंच गया है और मृतकों की संख्या करीब 247 बताई जा रही है। इस खबर के सामने आने के बाद से लोगों के मन में डर बैठ गया है। हर कोई यही सोच रहा है कि क्या इबोला भी कोरोना वायरस की तरह हवा के जरिए फैल सकता है?
आइए, वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के आधार पर समझते हैं कि इबोला वायरस असल में कैसे फैलता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का जवाब: इबोला वायरस कोरोना की तरह हवा के जरिए नहीं फैलता है। अगर इबोला से पीड़ित कोई मरीज आपके सामने खांसता या छींकता है, तो हवा में उसके वायरस वैसे नहीं तैरते जैसे कोरोना या नॉर्मल फ्लू के तैरते हैं। इसलिए सबसे पहली बात तो यह कि हवा से इसके फैलने का खतरा नहीं है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, इबोला वायरस तभी फैलता है जब आप किसी मरीज के बॉडी फ्लूइड्स (Body Fluids) यानी शरीर से निकलने वाली चीजों के सीधे संपर्क (Direct Contact) में आते हैं। इनमें शामिल हैं;
अगर किसी स्वस्थ इंसान के शरीर पर कोई कट या घाव है, या वो अपनी आंख, नाक और मुंह को मरीज के इन फ्लूइड्स से सने हाथों से छू लेता है, तभी यह वायरस उसके शरीर में जाता है।
इबोला वायरस सिर्फ मरीज के शरीर से ही नहीं, बल्कि उसकी इस्तेमाल की गई चीजों से भी फैल सकता है। अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति मरीज के कपड़े, बिस्तर, चादर या इस्तेमाल की गई सुई (Needle) को सीधे छूता है, जिस पर मरीज का खून या कोई दूसरा फ्लूइड लगा हो, तो उसे भी इबोला का इंफेक्शन हो सकता है।
कोरोना में हमने देखा था कि कई बार सामने वाले को कोई लक्षण (Symptoms) नहीं होते थे, फिर भी उससे कोरोना फैल जाता था। लेकिन इबोला में ऐसा बिल्कुल नहीं है। WHO के अनुसार, जब तक इबोला के मरीज के शरीर में लक्षण दिखाई नहीं देते (जैसे तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी), तब तक उससे दूसरे किसी इंसान को इन्फेक्शन होने का कोई खतरा नहीं होता।
कांगो में मामले जरूर बढ़े हैं, लेकिन डब्ल्यूएचओ का कहना है कि आम लोगों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है। यह बीमारी हवा से नहीं फैलती, इसलिए इसे कंट्रोल करना कोरोना के मुकाबले काफी आसान है। बस मरीजों की सही देखभाल, साफ-सफाई और इन्फेक्शन वाले इलाके से दूरी बनाकर इस वायरस को आसानी से रोका जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।