स्वास्थ्य

गर्दन में गांठ और रात में पसीना? Shark Tank की नई जज को इन्हीं मामूली लक्षणों ने पहुंचाया था कैंसर के स्टेज तक

Shark Tank India की नई शार्क कनिका टेकरीवाल ने 22 साल में हॉजकिन लिंफोमा को मात दी। जानें यह कैंसर क्या है और सेहत से जुड़ी जरूरी बातें।

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Jan 24, 2026
Shark Tank India Season (photo- insta @jetslacked)

Shark Tank India Season 5: शार्क टैंक इंडिया सीजन 5 में नई शार्क के रूप में शामिल हुईं एविएशन उद्यमी कनिका टेकरीवाल ने अपनी जिंदगी की वह सच्चाई साझा की, जो सिर्फ प्रेरणादायक ही नहीं बल्कि सेहत के नजरिए से भी बेहद अहम है। 22 साल की उम्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बाद कनिका ने न सिर्फ मौत को मात दी, बल्कि खुद को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाया।

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22 साल की उम्र में कैंसर का झटका

कनिका को हॉजकिन लिंफोमा नाम का कैंसर हुआ था। यह खबर उनके लिए और उनके परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी। उस वक्त वह अपने करियर और सपनों की शुरुआत कर रही थीं। कनिका ने बताया कि यह बीमारी उनके जीवन का सबसे कठिन दौर थी, लेकिन यही दौर उनकी ताकत भी बना।

हॉजकिन लिंफोमा क्या है?

हॉजकिन लिंफोमा एक तरह का ब्लड कैंसर होता है, जो शरीर की लिम्फैटिक सिस्टम को प्रभावित करता है। यह सिस्टम शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ा होता है। इस बीमारी में गर्दन, बगल या कमर की गांठें सूज जाती हैं। इसके अलावा लगातार बुखार, रात को पसीना आना, वजन तेजी से घटना और थकान इसके आम लक्षण हैं। अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान और सही इलाज से हॉजकिन लिंफोमा पूरी तरह ठीक हो सकता है।

मानसिक सेहत पर भी पड़ता है गहरा असर

कैंसर जैसी बीमारी सिर्फ शरीर को ही नहीं, दिमाग को भी झकझोर देती है। कनिका ने बताया कि इलाज के दौरान और उसके बाद मानसिक रूप से मजबूत रहना सबसे बड़ी चुनौती थी। कई बार अपनों की नकारात्मक बातें भी दर्द देती हैं। ऐसे में डॉक्टरों का मानना है कि कैंसर मरीजों के लिए मेंटल हेल्थ सपोर्ट उतना ही जरूरी है जितना दवाइयों का इलाज।

बीमारी ने सिखाया खुद पर भरोसा

कनिका मानती हैं कि कैंसर ने उन्हें यह सिखाया कि जिंदगी कितनी अनमोल है। उन्होंने कहा कि बीमारी ने उन्हें डरना नहीं, बल्कि हर हाल में लड़ना सिखाया। इलाज के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरू किया और बड़े फैसले लेने से कभी पीछे नहीं हटीं।

सेहत और हिम्मत का सीधा रिश्ता

डॉक्टरों के अनुसार, कैंसर से उबरने में मरीज की हिम्मत, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास का बड़ा रोल होता है। कनिका की कहानी इसका जीता-जागता उदाहरण है। सही इलाज, समय पर जांच और मजबूत मानसिकता से कैंसर जैसी बीमारी को भी हराया जा सकता है।

लक्षणों को नजरअंदाज न करें

कनिका टेकरीवाल की कहानी हमें यह भी सिखाती है कि शरीर में होने वाले बदलावों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। गांठ, लगातार थकान या वजन कम होना जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। समय पर इलाज न सिर्फ जान बचाता है, बल्कि जिंदगी को नई दिशा भी देता है।

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Published on:
24 Jan 2026 02:44 pm
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