
Karnataka Man Dies Of Swine Flu : सोमवार को कर्नाटक में स्वाइन फ्लू से एक 41 वर्षीय शख्स की मौत हो गई। "द हिंदू" की रिपोर्ट के मुताबिक, संक्रमण के बाद शख्स का इलाज एक प्राइवेट अस्पताल में चल रहा था, जहां उसने दम तोड़ दिया। करीब 3 हफ्तों में भारत में यह चौथी मौत बताई जा रही है। छत्तीसगढ़ में अब तक तीन मौतें हो चुकी हैं।
आकाशवाणी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, करीब दो हफ्ते पहले छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्वाइन फ्लू से एक और मरीज की मौत हो गई थी। इस जिले में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो चुकी है। वहीं, बिलासपुर में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या 100 के करीब पहुंच चुकी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, H1N1 (इन्फ्लूएंजा) वायरस सूअरों के जरिए जीवों में फैलता है। जब इंसान इनके संपर्क में आता है, तो यह वायरस उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसके बाद जब इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में कोई स्वस्थ व्यक्ति आता है, तो वह भी संक्रमित हो सकता है। इस तरह से यह वायरस ट्रैवल करता है।
बता दें, इसे स्वाइन फ्लू इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह वायरस सूअरों में पाए जाने वाले इन्फ्लूएंजा वायरस से काफी मिलता-जुलता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार स्वाइन फ्लू (H1N1) सांस से संबंधित एक संक्रामक रोग है, जो इन्फ्लूएंजा ए वायरस के एक खास स्ट्रेन (H1N1) के कारण होता है।
तेज बुखार और ठंड लगना, खांसी और गले में खराश, शरीर या मांसपेशियों में तेज दर्द, सिरदर्द और लगातार थकान महसूस होना, नाक बहना या बंद होना और कुछ मामलों में (विशेषकर बच्चों में) उल्टी और दस्त होना इसके मुख्य लक्षण हैं।
अगर आपको इस तरह के लक्षण दिखते हैं, तो बिना देरी किए पास के अस्पताल में जाकर जांच कराएं। अगर समय पर जांच और इलाज हो तो इससे जान को खतरा नहीं रहता है। देरी करने के कारण संक्रमण तेजी से फैल सकता है, साथ ही इससे अन्य लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
स्वाइन फ्लू से बचने का सबसे प्रभावी तरीका सालाना फ्लू का टीका लगवाना है। यह टीका हर साल लगवाकर बीमारी से बचा जा सकता है।
अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं। खांसते या छींकते समय अपने मुंह को टिशू या कोहनी से ढकें। इसके अलावा, बीमार लोगों के करीबी संपर्क में आने से बचें।