Kidney Stone Warning Signs: अब बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहे हैं किडनी स्टोन के मामले। यूरोलॉजिस्ट डॉ. रवि गुप्ता से जानिए कौन-सी रोज की आदतें बच्चों में पथरी का खतरा बढ़ा रही हैं और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Kidney Stone in Children: पहले किडनी स्टोन यानी पथरी की बीमारी को सिर्फ बड़ों की समस्या माना जाता था। लेकिन अब डॉक्टरों के पास स्कूल जाने वाले बच्चों में भी किडनी स्टोन के मामले तेजी से पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की खराब जीवनशैली और खानपान इसकी बड़ी वजह बन रहे हैं।
हाल ही में चेन्नई में एक 9 साल की बच्ची पेट और कमर के तेज दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची। जांच में पता चला कि उसकी किडनी में 7 मिलीमीटर की पथरी है। डॉक्टरों का कहना है कि अब ऐसे मामले दुर्लभ नहीं रहे।
यूरोलॉजिस्ट डॉ. रवि गुप्ता ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि सबसे बड़ी वजह है कम पानी पीना। गर्म इलाकों में रहने वाले बच्चे पसीने के जरिए ज्यादा पानी खो देते हैं, लेकिन उतना पानी नहीं पीते। उसकी जगह कई बच्चे कोल्ड ड्रिंक, पैकेट वाले जूस और स्पोर्ट्स ड्रिंक ज्यादा लेने लगे हैं। इनमें चीनी और नमक की मात्रा अधिक होती है, जो पथरी बनने का खतरा बढ़ा सकती है।
डॉक्टर का कहना है कि जब शरीर में पानी कम होता है तो पेशाब गाढ़ा हो जाता है। इससे किडनी में छोटे-छोटे क्रिस्टल बनने लगते हैं, जो आगे चलकर पथरी का रूप ले सकते हैं।
आजकल बच्चों में चिप्स, पैकेट स्नैक्स, फास्ट फूड और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थ खाने की आदत बढ़ रही है। इससे पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है, जो पथरी बनने का कारण बनती है। इसके अलावा ज्यादा मीठे पेय और जंक फूड शरीर में ऑक्सालेट और यूरिक एसिड बढ़ा सकते हैं। यही तत्व किडनी स्टोन के खतरे को बढ़ाते हैं।
डॉ. रवि गुप्ता के अनुसार कई माता-पिता यह सोचकर बच्चों को दूध देना कम कर देते हैं कि इससे पथरी बढ़ेगी। लेकिन यह गलत है। डॉक्टरों के मुताबिक शरीर में सही मात्रा में कैल्शियम होना जरूरी है। कम कैल्शियम लेने से उल्टा पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार अगर बच्चे में ये लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए-
डॉक्टर का कहना है कि अगर बचपन में किडनी स्टोन हो जाए तो आगे चलकर दोबारा पथरी बनने का खतरा बना रहता है। इसलिए समय रहते सही आदतें अपनाना बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।