स्वास्थ्य

Leg Pain Heart Attack: बार-बार पैरों में दर्द को न करें नजरअंदाज, हेल्थलाइन से समझें कैसे यह दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है

Leg Pain Heart Attack Risk: बार-बार पैरों में दर्द होना सिर्फ थकान नहीं, बल्कि खराब ब्लड सर्कुलेशन और दिल की बीमारी (PAD) का संकेत हो सकता है। हेल्थलाइन और ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन से जानें पैरों के दर्द और हार्ट हेल्थ का क्या कनेक्शन है।
2 min read
Jul 21, 2026
Leg pain and heart disease connection, Early signs of heart attack leg pain, Peripheral artery disease leg pain,
बार-बार पैरों में दर्द होना सिर्फ थकान नहीं, बल्कि दिल की बीमारी (PAD) का संकेत हो सकता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Leg Pain Heart Attack Symptoms: हम में से ज्यादातर लोग अक्सर पैरों के दर्द को दिनभर की भागदौड़, थकावट या बढ़ती उम्र का असर मानकर टाल देते हैं। कभी थोड़ा बाम लगा लिया, तो कभी गर्म पानी की सेंक कर ली और बात खत्म! लेकिन क्या आप जानते हैं कि पैरों का यही दर्द आपके दिल की सेहत से जुड़ा एक बड़ा अलर्ट हो सकता है?

हेल्थलाइन के मुताबिक, पैरों में बार-बार उठने वाला ऐंठन भरा दर्द केवल मांसपेशियों (muscles) की समस्या नहीं है। यह आपकी धमनियों (arteries) में बन रही रुकावट का इशारा हो सकता है, जिसका सीधा रिश्ता दिल के दौरे (Heart Attack) या स्ट्रोक से होता है। आइए जानते हैं कि दर्द और दिल के स्वास्थ्य के बीच क्या कनेक्शन है और आपको कब सावधान हो जाना चाहिए।

पैरों के दर्द और दिल की बीमारी में क्या कनेक्शन है?

हमारे शरीर में खून को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए रक्त वाहिकाएं (blood vessels) होती हैं। जिस तरह दिल की नसों में वसा या कोलेस्ट्रॉल जमा होने से खून की सप्लाई रुकने लगती है, ठीक उसी तरह पैरों तक खून पहुंचाने वाली नसों में भी रुकावट आ सकती है। ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के अनुसार, इस स्थिति को पेरिफेरल आर्टरी डिजीज (PAD - Peripheral Artery Disease) कहा जाता है। अगर आपके पैरों की नसों में यह ब्लॉकज है, तो इस बात की पूरी आशंका होती है कि शरीर की बाकी नसों, जैसे दिल और दिमाग की नसों में भी रुकावट बन रही हो।

PAD और दिल से जुड़े खतरे के मुख्य लक्षण

  • चलते समय ऐंठन या दर्द होना।
  • आराम करते ही दर्द का गायब हो जाना।
  • पैरों में सुन्नपन या ठंडक महसूस होना।
  • घाव या चोट का धीरे भरना।
  • त्वचा और नाखूनों के रंग में बदलाव।

किन लोगों को इस दर्द का ज्यादा खतरा रहता है?

  • स्मोकिंग करने वालों में।
  • डायबिटीज (Sugar)।
  • हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल।
  • 50 की उम्र के बाद और जो लोग पूरे दिन एक ही जगह बैठकर काम करते हैं।

बचाव के उपाय

  • रोजाना थोड़ा टहलें (Walking)।
  • खान-पान में सुधार करें।
  • स्मोकिंग तुरंत बंद करें।
  • शुगर और बीपी कंट्रोल में रखें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Updated on:
21 Jul 2026 09:11 am
Published on:
21 Jul 2026 09:11 am
Also Read
View All
LDL Cholesterol क्या होता है, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए कितना होना चाहिए इसका लेवल और इसके बढ़ने से किन बिमारियों का खतरा

Klinefelter Syndrome क्या है? एनएचएस ने बताया पुरुषों में बांझपन और कम टेस्टोस्टेरोन की वजह बन सकती है यह जेनेटिक स्थिति

Dengue Vaccine QDENGA Price: भारत डेंगू की पहली वैक्सीन को मंजूरी, रु6000-12000 में लग सकता है एक शॉट, फिजिशियन से जानें 2 डोज का तरीका

Period Blood Color Chart: पीरियड ब्लड का रंग बदलना क्या है नॉर्मल? क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए कौन-सा रंग क्या संकेत देता है

Cancer का कौन-सा प्रकार सबसे ज्यादा घातक है, WHO और वेरीवेल हेल्थ से जानें किन संकेतों को न करें नजरअंदाज