Liver Cancer Causes: लिवर कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। जानें इसके कारण, शुरुआती लक्षण और बचाव के तरीके, एक्सपर्ट Dr. Rinkesh Kumar Bansal की सलाह के साथ।
Liver Cancer Causes: आज के समय में Liver Cancer, फैटी लिवर और सिरोसिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सबसे चिंता की बात ये है कि ज्यादातर लोगों को तब तक पता ही नहीं चलता, जब तक बीमारी काफी बढ़ नहीं जाती। सवाल यही है क्या हम अब भी लिवर हेल्थ को नजरअंदाज कर रहे हैं?
डॉ. रिंकेश कुमार बंसल के मुताबिक, “लिवर कैंसर के केस लगातार बढ़ रहे हैं। खराब लाइफस्टाइल, इंफेक्शन और देर से पहचान इसकी बड़ी वजह हैं।” यानि अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह बीमारी जानलेवा बन सकती है।
सबसे बड़ा कारण है Hepatitis B और Hepatitis C जैसे इंफेक्शन। ये लंबे समय तक बिना लक्षण के लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं। धीरे-धीरे ये सिरोसिस और फिर कैंसर में बदल सकते हैं। इसके अलावा आज की लाइफस्टाइल भी बड़ा कारण है:
लिवर कैंसर की सबसे चुनौतीपूर्ण बात यह है कि इसके शुरुआती चरण में शरीर स्पष्ट संकेत नहीं देता, जिसके कारण अधिकांश लोग इसे पहचान नहीं पाते। अक्सर अचानक वजन का कम होना, शरीर में लगातार बनी रहने वाली थकान, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या सूजन और त्वचा या आंखों में पीलापन (पीलिया) जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। विडंबना यह है कि इन संकेतों को लोग अक्सर सामान्य शारीरिक कमजोरी या पेट की मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, लक्षणों को हल्के में लेकर इलाज में देरी करना ही सबसे बड़ी गलती साबित होती है, क्योंकि समय पर पहचान ही इस बीमारी में जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।
बीमारी के एडवांस स्टेज में पहुंचने का सबसे बड़ा कारण हमारी सेहत के प्रति लापरवाही और जागरूकता का अभाव है। लोग अक्सर रेगुलर हेल्थ चेकअप को जरूरी नहीं समझते और जब तक शरीर में गंभीर तकलीफ महसूस नहीं होती, तब तक जरूरी टेस्ट कराने से बचते हैं। इसी देरी और समय पर डायग्नोसिस न होने के कारण बीमारी धीरे-धीरे शरीर में जड़ें जमा लेती है। जागरूकता की कमी के चलते लोग शुरुआती संकेतों को पहचान नहीं पाते, जिससे इलाज उस वक्त शुरू होता है जब स्थिति काफी जटिल हो चुकी होती है और रिकवरी की संभावना कम रह जाती है।
लिवर कैंसर से काफी हद तक बचा जा सकता है, बस थोड़ी सावधानी जरूरी है:
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।