Long Covid Effects: कोरोना संक्रमण के बाद भी सांस फूलना और थकान बनी रह सकती है। स्वीडन की स्टडी में खुलासा 50% मरीजों में ढाई साल बाद भी लक्षण।
Long Covid Effects: भले ही कोरोना संक्रमण का दौर अब बीती बात लगता हो, लेकिन इसके असर पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। दुनियाभर में ऐसे लाखों लोग हैं, जो कोविड से ठीक होने के बाद भी महीनों और सालों तक शारीरिक और मानसिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। इसे मेडिकल भाषा में लॉन्ग कोविड कहा जाता है।
अक्सर यह माना जाता है कि जिन लोगों को कोविड हल्के रूप में हुआ, उन्हें आगे कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन हालिया शोध इस धारणा को गलत साबित करता है। रिसर्च के मुताबिक, जिन मरीजों को कोविड के दौरान अस्पताल में भर्ती तक नहीं होना पड़ा, उनमें भी संक्रमण के असर दो साल बाद तक देखे गए।
स्वीडन के प्रसिद्ध कारोलिंस्का इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिकों ने लॉन्ग कोविड से जूझ रहे वयस्कों पर एक विस्तृत अध्ययन किया। इस शोध में मार्च 2020 से लेकर दिसंबर 2024 तक के आंकड़ों को शामिल किया गया। अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल BMC Health में प्रकाशित हुए हैं।
स्टडी में यह सामने आया कि समय के साथ कुछ मरीजों की हालत में सुधार जरूर हुआ, लेकिन पूरी तरह राहत सभी को नहीं मिली। शोध के मुताबिक, ढाई साल बाद भी करीब 50 प्रतिशत मरीजों को सांस फूलने की समस्या बनी रही। इसके अलावा, लगातार थकान महसूस होना और मानसिक तनाव भी आम समस्याएं रहीं।
सिर्फ सांस से जुड़ी दिक्कतें ही नहीं, बल्कि लॉन्ग कोविड से जूझ रहे कई मरीजों ने लगातार कमजोरी, जल्दी थक जाना, नींद न आना और चिंता जैसी मानसिक समस्याओं की शिकायत भी की। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज पर गहरा असर डाल सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड संक्रमण शरीर के कई अंगों पर असर डाल सकता है, खासकर फेफड़ों, नसों और इम्यून सिस्टम पर। यही वजह है कि कुछ लोगों में रिकवरी की प्रक्रिया उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबी हो जाती है।