
Metformin and Cancer: डायबिटीज आज दुनिया भर में एक आम लेकिन गंभीर बीमारी बन चुकी है। अगर समय रहते ब्लड शुगर कंट्रोल न की जाए, तो इसके कई खतरे हो सकते हैं। टाइप-2 डायबिटीज में सबसे ज्यादा दी जाने वाली दवा मेटफॉर्मिन है, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है। हाल के कुछ सालों में इस दवा को लेकर यह चर्चा भी शुरू हुई है कि क्या मेटफॉर्मिन कैंसर पर भी असर डाल सकती है।
मेटफॉर्मिन शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाती है और लिवर में बनने वाली अतिरिक्त शुगर को कम करती है। इसी वजह से यह टाइप-2 डायबिटीज की पहली और सबसे सुरक्षित दवाओं में गिनी जाती है। कई दशकों से इसका इस्तेमाल हो रहा है और आमतौर पर यह सुरक्षित मानी जाती है।
रिसर्च से पता चला है कि टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में कुछ कैंसर, जैसे लिवर, पैंक्रियास, कोलन और ब्रेस्ट कैंसर का खतरा थोड़ा ज्यादा होता है। इसका कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा और शरीर में लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन मानी जाती है। जब शरीर में इंसुलिन ज्यादा रहता है, तो यह कोशिकाओं की असामान्य बढ़त को बढ़ावा दे सकता है।
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि मेटफॉर्मिन कैंसर कोशिकाओं की ग्रोथ को धीमा कर सकती है। यह शरीर में सूजन को कम करने, कोशिकाओं के मेटाबॉलिज्म को संतुलित करने और इंसुलिन लेवल घटाने में मदद करती है। इससे कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल कम मिल पाता है। हालांकि यह असर हर मरीज में एक जैसा हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
इस बात को साफ समझना जरूरी है कि मेटफॉर्मिन कैंसर की दवा नहीं है। कुछ स्टडीज़ में यह देखा गया है कि लंबे समय तक मेटफॉर्मिन लेने वाले डायबिटीज मरीजों में कोलन और लिवर कैंसर का जोखिम थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन ये स्टडीज़ केवल संबंध दिखाती हैं, पक्का सबूत नहीं। आज भी मेटफॉर्मिन को कैंसर के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसे लेकर कुछ क्लीनिकल ट्रायल जरूर चल रहे हैं, लेकिन अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
कैंसर से बचाव के लिए मेटफॉर्मिन खुद से लेना बिल्कुल सही नहीं है। इससे उल्टी, दस्त और कुछ मामलों में गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। डायबिटीज और कैंसर दोनों से बचाव का सबसे सही तरीका है, संतुलित खान-पान, रोजाना एक्सरसाइज, अच्छी नींद और समय-समय पर जांच कराना।