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Monsoon Skin Infection: बारिश में पैरों की खुजली और फंगल इंफेक्शन से कैसे बचें? CDC से जानिए बचने के उपाय

Monsoon Skin Infection: बारिश में पैरों की खुजली, उंगलियों के बीच सफेद परत, जलन या बदबू को नजरअंदाज न करें। CDC, Mayo Clinic और MedlinePlus के अनुसार जानिए फंगल इंफेक्शन के लक्षण, कारण और बचाव के आसान उपाय।
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भारत

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Dimple Yadav

Jun 27, 2026

Monsoon Skin InfectionFungal Infection in Feet Athlete's Foot

मानसून में पैरों के फंगल इंफेक्शन से कैसे बचें (photo- freepik)

Fungal Infection in Feet: क्या बारिश में भीगने के बाद आपके पैरों में खुजली शुरू हो जाती है? उंगलियों के बीच सफेद परत, जलन या बदबू आने लगती है? अगर हां, तो इसे सिर्फ मौसम का असर समझकर नजरअंदाज न करें। यह फंगल इंफेक्शन की शुरुआत भी हो सकती है।

Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के अनुसार, फंगस गर्म, नम और पसीने वाली जगहों पर तेजी से बढ़ता है। इसलिए मानसून में गीले जूते-मोजे पहनना या पैरों को लंबे समय तक नम रखना फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ा सकता है।आइए आसान भाषा में समझते हैं कि बारिश के मौसम में पैरों में फंगल इंफेक्शन क्यों होता है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।

पैरों में फंगल इंफेक्शन क्या होता है?

Mayo Clinic के अनुसार, पैरों में होने वाला सबसे आम फंगल इंफेक्शन एथलीट्स फुट (Athlete's Foot) कहलाता है। यह एक संक्रामक त्वचा संक्रमण है, जो अक्सर पैरों की उंगलियों के बीच शुरू होता है। यह संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में या गीले फर्श, स्विमिंग पूल, सार्वजनिक बाथरूम और संक्रमित जूतों या तौलियों के संपर्क से भी फैल सकता है।

मानसून में पैरों में फंगल इंफेक्शन का खतरा क्यों बढ़ जाता है?

बारिश का मौसम आते ही हवा में नमी और उमस बहुत बढ़ जाती है, जो फंगस को पनपने के लिए सबसे मुफीद माहौल देती है। इस सुहावने मौसम में अक्सर हमारे जूते-मोजे लंबे समय तक गीले रह जाते हैं या फिर पैरों में लगातार पसीना बना रहता है। सड़क पर चलते हुए कीचड़ और गंदे पानी के संपर्क में आने से बैक्टीरिया और फंगस सीधे हमारे पैरों पर हमला करते हैं। जब हम घंटों तक बंद जूते पहने रहते हैं, तो पैरों को हवा नहीं मिल पाती, जिससे फंगस को बढ़ने का पूरा मौका मिल जाता है और यही वजह है कि मानसून में एथलीट फुट या फंगल इंफेक्शन के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं।

शुरुआती लक्षण जिन्हें पहचानना है जरूरी

अगर आपके पैरों में कुछ खास बदलाव दिख रहे हैं, तो उन्हें मामूली समझकर छोड़ें नहीं। इसकी शुरुआत अक्सर पैरों की उंगलियों के बीच तेज और लगातार होने वाली खुजली से होती है। धीरे-धीरे उंगलियों के बीच की वह त्वचा सफेद, बहुत ज्यादा मुलायम या पपड़ीदार होकर छूटने लगती है। जूते पहनने या चलने पर वहां जलन और चुभन महसूस हो सकती है और संक्रमण बढ़ने के साथ ही पैरों से अजीब सी बदबू आने लगती है। कई बार त्वचा फटने लगती है, छोटी दरारें आ जाती हैं और प्रभावित हिस्से में लालपन व सूजन दिखने लगती है। अगर संक्रमण गंभीर हो जाए, तो वहां पानी से भरे छोटे-छोटे फफोले भी बन सकते हैं।

किन लोगों को होता है इसका सबसे ज्यादा जोखिम?

CDC और मेयो क्लिनिक के मुताबिक, फंगल इंफेक्शन का खतरा हर उस व्यक्ति को ज्यादा होता है जिसके पैर काम के सिलसिले में या मजबूरी में लंबे समय तक गीले रहते हैं या जो लगातार कई घंटों तक बंद जूते पहने रहते हैं। खिलाड़ियों या बहुत ज्यादा पसीना आने वाले लोगों में भी यह समस्या आम है। इसके अलावा, मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों और कमजोर इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) वाले लोगों को खास तौर पर अपना ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि उनमें यह संक्रमण बहुत जल्दी फैलता है और इसे हील होने में वक्त लगता है।

बचाव के कुछ बेहद आसान और कारगर उपाय

इस समस्या से बचने के लिए एक्सपर्ट्स कुछ साधारण आदतें सुधारने की सलाह देते हैं। जब भी आप बाहर से बारिश में भीगकर आएं, तो सबसे पहले पैरों को साफ पानी और साबुन से धोएं और उन्हें अच्छी तरह सुखाएं, खासकर उंगलियों के बीच की जगह को बिल्कुल गीला न छोड़ें। रोजाना साफ और पूरी तरह सूखे हुए सूती (कॉटन) मोजे ही पहनें। अगर जूते गीले हो गए हैं, तो उन्हें दोबारा पहनने से पहले धूप या हवा में अच्छी तरह सुखा लें। अपनी निजी चीजें जैसे तौलिया, जूते या मोजे किसी और के साथ शेयर करने से बचें। सार्वजनिक जगहों जैसे जिम, स्विमिंग पूल या कॉमन बाथरूम में कभी भी नंगे पैर न जाएं, हमेशा चप्पल पहनकर रखें। अगर आपको पैरों में बहुत ज्यादा पसीना आता है, तो डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह लेकर एंटीफंगल पाउडर का इस्तेमाल करना एक बेहतरीन विकल्प है।

कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?

अगर खुजली, लालपन या त्वचा फटने की समस्या कई दिनों तक बनी रहे, संक्रमण फैलने लगे, मवाद निकलने लगे या दर्द बढ़ जाए, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। मधुमेह के मरीजों को पैरों में किसी भी तरह का संक्रमण होने पर देर नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उनमें जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।