स्वास्थ्य

Miscarriage Risk: प्रेग्नेंसी के पहले 24 हफ्तों में क्यों बढ़ जाता है गर्भपात का जोखिम, NHS से जानिए किन महिलाओं को रहना चाहिए ज्यादा सतर्क

Miscarriage: प्रेग्नेंसी के पहले 24 हफ्तों में बढ़ जाता है मिसकैरेज का खतरा। एनएचएस की रिपोर्ट के हवाले से जानिए इसके कारण, शुरुआती लक्षण और किन महिलाओं को रहना चाहिए ज्यादा सतर्क।
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Updated: 25 Jun 2026, 2:50 PM IST
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प्रेग्नेंसी के पहले 24 हफ्तों में बढ़ जाता है मिसकैरेज का खतरा- - (Photo- Freepik)

Miscarriage Risk Hindi: मां बनना हर महिला की जिंदगी का सबसे खूबसूरत अहसास होता है, लेकिन इस सफर में थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी होना बेहद जरूरी है। प्रेग्नेंसी के शुरुआती दिनों में अक्सर महिलाओं के मन में एक डर छिपा होता है, गर्भपात यानी मिसकैरेज का डर।

एनएचएस (NHS) रिपोर्ट बताती है कि प्रेग्नेंसी के पहले 24 हफ्तों (करीब 5-6 महीने) के अंदर मिसकैरेज का खतरा सबसे ज्यादा होता है। मेयो क्लिनिक के अनुसार, प्रेग्नेंसी के 20वें सप्ताह से पहले अचानक समाप्त हो जाने को मिसकैरेज कहते हैं। आइए समझते हैं कि ऐसा क्यों होता है, इसके क्या लक्षण हैं और किन महिलाओं को इस दौरान थोड़ा ज्यादा संभलकर रहने की जरूरत है।

क्या होता है मिसकैरेज और पहले 24 हफ्ते क्यों हैं नाजुक?

प्रेग्नेंसी के पहले 24 हफ्तों के अंदर अगर किसी वजह से गर्भ में पल रहा बच्चा खुद-ब-खुद गिर जाता है या नष्ट हो जाता है, तो उसे मेडिकल की भाषा में मिसकैरेज कहते हैं। शुरुआती 3 महीने (पहले 12 हफ्ते) तो सबसे ज्यादा नाजुक माने जाते हैं क्योंकि इस दौरान बच्चे के मुख्य अंग बन रहे होते हैं।

एनएचएस के मुताबिक, ज्यादातर मिसकैरेज इसी समय होते हैं, और अक्सर इसके पीछे महिला की कोई गलती नहीं होती, बल्कि कुदरती कारण होते हैं।

क्यों होता है मिसकैरेज?

अक्सर जब किसी महिला का मिसकैरेज होता है, तो समाज या वो खुद को दोष देने लगती है कि शायद मैंने भारी सामान उठा लिया था या सीढ़ियां चढ़ ली थीं। लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। इसके कारण ये हैं;

किन महिलाओं को रहना चाहिए ज्यादा सतर्क?

  • 35 साल और खासकर 40 साल के बाद प्रेग्नेंट होने वाली महिलाओं में मिसकैरेज का रिस्क काफी बढ़ जाता है।
  • जिन महिलाओं का पहले मिसकैरेज हो चुका है।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकिंग (धूम्रपान) करना, शराब पीना या बहुत ज्यादा कैफीन (चाय-कॉफी) का सेवन करना।
  • वजन का बहुत ज्यादा होना।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

  • ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होना।
  • पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द।
  • पानी जैसा डिस्चार्ज।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
25 Jun 2026, 2:50 PM IST
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