स्वास्थ्य

Muscle Loss: 40 की उम्र के बाद क्यों घटने लगती है शरीर की ताकत, Harvard Health और Cleveland Clinic से जानिए

Muscle Loss Hindi: 40 की उम्र के बाद शरीर में कमजोरी महसूस होना सिर्फ बुढ़ापा नहीं, बल्कि सार्कोपेनिया (मसल लॉस) की निशानी हो सकता है। जानिए Harvard Health की रिपोर्ट के अनुसार इसके मुख्य लक्षण और मांसपेशियों को मजबूत रखने के उपाय।
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Updated: 22 Jul 2026, 1:53 PM IST
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40 की उम्र के बाद शरीर में कमजोरी महसूस होना सिर्फ बुढ़ापा नहीं, बल्कि सार्कोपेनिया (मसल लॉस) की निशानी हो सकता है।- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Muscle Loss After 40: अक्सर लोगों को लगता है कि शरीर का थकना, हाथ-पैरों में कमजोरी आना सिर्फ बुढ़ापे की सामान्य निशानी है। असल में इसके पीछे की बड़ी वजह हो सकती है सार्कोपेनिया (Sarcopenia), यानी शरीर की मांसपेशियों (Muscles) का कम होना।

हार्वर्ड हेल्थ (Harvard Health) और क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, 30 से 40 की उम्र के बाद हर इंसान के शरीर से मसल्स (Muscle Mass) कम होने लगता है। अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए, तो इससे शरीर में पकड़ कमजोर होने लगती है और रोजमर्रा के काम भी मुश्किल लगने लगते हैं। अच्छी बात यह है कि सही खान-पान और एक्सरसाइज से इस समस्या को रोका जा सकता है।

सार्कोपेनिया (Sarcopenia) क्या है और यह क्यों होता है?

सार्कोपेनिया का मतलब है उम्र के साथ मांसपेशियों की ताकत और मात्रा में कमी आना। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे शरीर में प्रोटीन बनाने की क्षमता कम होने लगती है। इसके अलावा, शरीर में हार्मोन्स में बदलाव होना, सही मात्रा में प्रोटीन न लेना और मांसपेशियों की नसों में कमजोरी आना भी इसके मुख्य कारण हैं।

कैसे पहचानें कि आपकी मसल्स कम हो रही हैं?

  • हाथ की पकड़ कमजोर होना।
  • सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी।
  • चलने की रफ्तार धीमी होना।
  • संतुलन न बनना।

यह क्यों खतरनाक हो सकती है?

जब शरीर में मसल्स कम होती हैं, तो हड्डियों पर सीधा दबाव पड़ता है। इससे गिरने और हड्डियां टूटने (Fracture) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही, इंसान का शरीर सुस्त हो जाता है, जिससे डायबिटीज, मोटापा और दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

मांसपेशियों को मजबूत रखने के 4 उपाय

  • भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं।
  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (ताकत वाले व्यायाम) जरूर करें।
  • विटामिन डी (Vitamin D) का ध्यान रखें।
  • रोजाना एक्टिव रहें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
22 Jul 2026, 1:53 PM IST
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