
Nephrotic Syndrome Symptoms: अक्सर जब हमारे पैरों या टखनों में हल्की सूजन आती है, तो हम सोचते हैं कि दिनभर खड़े रहने या थकान की वजह से ऐसा हुआ होगा। इसी तरह, टॉयलेट पॉट में झाग दिखने पर भी हम उसे नॉर्मल मानकर फ्लश कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर के ये छोटे-छोटे बदलाव असल में आपकी किडनी के संकट में होने का इशारा हो सकते हैं।
मेयो क्लिनिक के मुताबिक, जब हमारी किडनी का फिल्टर सिस्टम ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में प्रोटीन की भारी कमी होने लगती है, जिसे नेफ्रोटिक सिंड्रोम (Nephrotic Syndrome) कहा जाता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, नेफ्रोटिक सिंड्रोम लाइलाज है। यह अक्सर बच्चों में किशोरावस्था के आखिरी सालों या 20 साल की उम्र के शुरुआती सालों में अपने आप ठीक हो जाता है। आइए जानते हैं कि यह बीमारी क्या है और इसे पहचानना क्यों जरूरी है।
नेफ्रोटिक सिंड्रोम खुद में कोई अकेली बीमारी नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि आपकी किडनी के अंदर मौजूद ग्लोमेरुली (Glomeruli) नाम के छोटे-छोटे ब्लड फिल्टर खराब या डैमेज हो रहे हैं। इन फिल्टरों का काम शरीर की गंदगी को बाहर निकालना और जरूरी चीजों (जैसे प्रोटीन) को शरीर के अंदर ही रोक कर रखना होता है। लेकिन जब ये फिल्टर खराब हो जाते हैं, तो शरीर के लिए जरूरी एल्ब्युमिन प्रोटीन लीक होकर पेशाब के रास्ते बाहर निकलने लगता है।
मेयो क्लिनिक की रिसर्च के अनुसार, किडनी के फिल्टर खराब होने के पीछे कई बड़ी वजहें हो सकती हैं:
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।