
Neurogenic Bowel Dysfunction Symptoms: हममें से ज्यादातर लोग कब्ज, पेट फूलना या मल त्याग में परेशानी को खानपान की गड़बड़ी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ मामलों में इसकी वजह सिर्फ पाचन तंत्र नहीं, बल्कि नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) भी हो सकता है?
रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) या नसों और आंतों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान प्रभावित हो जाता है, तो व्यक्ति को न्यूरोजेनिक बोवेल डिसफंक्शन (NBD) नामक समस्या हो सकती है। यह स्थिति मल त्याग को नियंत्रित करने की शरीर की क्षमता को प्रभावित करती है। Cleveland Clinic और PubMed में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार यह समस्या रीढ़ की हड्डी की चोट, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, पार्किंसन रोग और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से जुड़ी हो सकती है।
न्यूरोजेनिक बोवेल डिसफंक्शन (NBD) ऐसी स्थिति है जिसमें आंतों की सामान्य कार्यप्रणाली नसों के क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रभावित हो जाती है। आमतौर पर हमारा मस्तिष्क और नसें आंतों को संकेत भेजती हैं कि भोजन को आगे बढ़ाना है और मल त्याग कब करना है। लेकिन जब यह संचार बाधित हो जाता है, तो व्यक्ति को कब्ज, मल रोक न पाना या दोनों समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
कई दिनों तक पेट साफ न होना NBD का प्रमुख संकेत हो सकता है।
शौच के दौरान बहुत ज्यादा जोर लगाना पड़ सकता है।
आंतों में मल जमा होने के कारण पेट भरा-भरा महसूस हो सकता है।
कुछ लोगों में मल पर नियंत्रण कम हो सकता है।
आंतों की धीमी गति के कारण पेट में दर्द या ऐंठन हो सकती है।
पाचन प्रक्रिया प्रभावित होने पर गैस की समस्या बढ़ सकती है।
शौच के बाद भी ऐसा लग सकता है कि पेट पूरी तरह साफ नहीं हुआ।
PubMed में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार NBD का खतरा इन स्थितियों में अधिक देखा जाता है:
RSNA (Radiological Society of North America) की समीक्षा के अनुसार NBD केवल कब्ज तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति की दैनिक जीवनशैली, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर सकता है। कई मरीज घर से बाहर जाने, यात्रा करने या सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होने से भी कतराने लगते हैं क्योंकि उन्हें मल त्याग पर नियंत्रण न रहने का डर होता है।
यदि आपको लगातार कब्ज रहती है। मल रिसाव की समस्या है। पेट बार-बार फूलता है। न्यूरोलॉजिकल बीमारी के साथ पेट की समस्या बढ़ रही है। तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
Cleveland Clinic के अनुसार इलाज मरीज की स्थिति और कारण पर निर्भर करता है। इसमें शामिल हो सकते हैं:
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।