
Normal Blood Pressure By Age: विश्व स्वस्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ/ WHO )के अनुसार, दुनिया में करीब 1.4 अरब लोग हाई ब्लड प्रेशर (High BP) के शिकार हैं। अक्सर लोग सोचते हैं कि हर किसी का बीपी बस 120/80 ही होना चाहिए। लेकिन रिसर्च कहती है कि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे शरीर का नॉर्मल बीपी लेवल भी थोड़ा-बहुत बदलता रहता है।
हार्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, हर उम्र के इंसान का शरीर अलग होता है, इसलिए नॉर्मल बीपी का मीटर भी अलग होता है;
1. 18 से 39 साल (युवा)- इस उम्र में महिलाओं का बीपी पुरुषों से थोड़ा कम रहता है। महिलाओं के लिए 110/68 और पुरुषों के लिए 119/70 को एकदम परफेक्ट माना जाता है।
2. 40 से 59 साल (अधेड़ उम्र)- जैसे ही उम्र 40 पार करती है, दोनों का बीपी लगभग एक जैसा होने लगता है। इस उम्र में महिलाओं का 122/74 और पुरुषों का 124/77 होना बिल्कुल नॉर्मल है।
3. 60 साल या उससे ऊपर (बुजुर्ग)- बुढ़ापे में एक बहुत ही दिलचस्प बदलाव देखने को मिलता है। 60 की उम्र के बाद बुजुर्ग महिलाओं का ऊपर का बीपी पुरुषों से ज्यादा रहने लगता है। इस उम्र में महिलाओं के लिए 139/68 और पुरुषों के लिए 133/69 का लेवल सामान्य माना जाता है।
1. नवजात शिशु (1 महीने तक के बच्चे)- बिल्कुल छोटे या पैदा हुए बच्चों का बीपी बहुत कम होता है। इनका ऊपर का बीपी 60 से 90 और नीचे का बीपी 20 से 60 के बीच होना बिल्कुल नॉर्मल है।
2. शिशु (1 महीने से 1 साल तक के बच्चे)- थोड़े बड़े बच्चों का बीपी ऊपर की तरफ 87 से 105 और नीचे की तरफ 53 से 66 के बीच रहना सही माना जाता है।
3. घुटनों के बल चलने वाले बच्चे (1 से 2 साल)- इस उम्र के बच्चों का ऊपर का बीपी 95 से 105 और नीचे का बीपी 53 से 66 के बीच होना चाहिए।
4. स्कूल जाने से पहले के बच्चे (3 से 5 साल)- जो बच्चे अभी छोटे स्कूल या प्ले-स्कूल जाते हैं, उनका ऊपर का बीपी 95 से 110 और नीचे का बीपी 56 से 70 के बीच सामान्य माना जाता है।
5. स्कूल जाने वाले बच्चे (6 से 12 साल)- बढ़ते बच्चों का ऊपर का बीपी 97 से 112 और नीचे का बीपी 57 से 71 के बीच रहना एकदम परफेक्ट है।
6. किशोर या टीनेजर्स (13 साल से बड़े)- जो बच्चे अब बड़े हो रहे हैं, उनका बीपी लगभग बड़ों के स्तर के पास पहुंचने लगता है। इस उम्र में ऊपर का बीपी 112 से 128 और नीचे का बीपी 66 से 80 के बीच होना बिल्कुल सही है।
डॉक्टर बाबूलाल वर्मा ने बताया कि बीपी का बढ़ना तीन अलग-अलग लेवल में देखा जाता है;
1. थोड़ा बढ़ा हुआ बीपी- जब ऊपर का नंबर 120 से बढ़कर 129 तक पहुंच जाए, लेकिन नीचे का नंबर 80 ही रहे। इसे चेतावनी मानकर लाइफस्टाइल ठीक करनी चाहिए।
2. शुरुआती हाई बीपी (स्टेज 1)- जब ऊपर का नंबर लगातार 130 से 139 के बीच और नीचे का नंबर 80 से 89 के बीच रहने लगे।
3. गंभीर हाई बीपी (स्टेज 2)- जब बीपी का मीटर 140/90 या उससे ऊपर पहुंच जाए। इसे हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी मान लिया जाता है।
कई लोग बीपी थोड़ा सा बढ़ते ही डर जाते हैं और खुद से दवा खाने की सोचने लगते हैं, जो कि बिल्कुल गलत है। डॉक्टर वर्मा के अनुसार अगर बीपी 130-139 / 80-89 के बीच है और यदि मरीज को शुगर या दिल की कोई पुरानी बीमारी नहीं है, तो डॉक्टर तुरंत दवा शुरू नहीं करते। वे मरीज को 3 से 6 महीने का समय देते हैं और कहते हैं कि रोज सुबह टहलो, खाने में नमक कम करो, वजन घटाओ और योग करो।
अगर कई बार चेक करने के बाद भी बीपी 140/90 से नीचे नहीं आ रहा है, तो डॉक्टर तुरंत रोज खाने वाली दवा शुरू कर देते हैं। ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि आगे चलकर कभी हार्ट अटैक या पैरालिसिस (लकवा) का खतरा न हो। अगर बीपी अचानक 180/120 से ऊपर चला जाए, तो यह बहुत खतरनाक स्थिति है। ऐसे में बिना देर किए मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।
अमेरिकन नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के अनुसार, जब भी आप डॉक्टर के पास बीपी नपवाते हैं, तो वह आपको दो नंबर बताते हैं, जैसे 120 और 80। ऊपर का नंबर (बड़ा नंबर) यह बताता है कि जब हमारा दिल धड़कता है और पूरे शरीर में खून जाता है, तो खून की नसों पर कितना दबाव पड़ता है। नीचे का नंबर (छोटा नंबर) बताता है कि दो धड़कनों के बीच में, जब हमारा दिल एक पल के लिए आराम करता है, तब नसों में कितना दबाव रहता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।