
पोस्टपार्टम डिप्रेशन से पीड़ित एक नई मां- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Postpartum Depression Cause: मां बनना दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास माना जाता है। लेकिन कई बार नई मां अंदर ही अंदर एक अजीब से अकेलेपन, उदासी और घबराहट से जूझ रही होती है। कई बार तो बिना किसी बात के ही बस रोने का मन करने लगता है।
अक्सर घर के लोग इसे कमजोरी या थकान कहकर टाल देते हैं, लेकिन क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) की रिपोर्ट की मानें, तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum Depression) हो सकता है जो लगभग 7 में से 1 महिला को प्रभावित करता है। आइए डॉक्टर शैलजा अग्रवाल (स्त्री रोग विशेषज्ञ) से जानते हैं कि बेबी ब्लूज और पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या अलग-अलग होते हैं और मनोचिकित्सक डॉक्टर आदित्य सोनी से समझते हैं कि इसकी पहचान कैसे करें।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती 10 से 12 दिनों तक मूड का बार-बार बदलना, चिड़चिड़ापन होना या बात-बात पर रोना आना बहुत आम बात है। इसे बेबी ब्लूज (Baby Blues) कहते हैं। यह शरीर में अचानक बदले हार्मोन्स और भारी थकान की वजह से होता है और कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है।
डॉक्टर शैलजा का कहना है कि अगर यह उदासी, रोने का मन और चिड़चिड़ापन डिलीवरी के 2-3 हफ्ते बाद भी ठीक न हो, बल्कि हफ्तों या महीनों तक लगातार बढ़ता ही जाए, तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इशारा है। यह कोई पागलपन या कमजोरी नहीं है, बल्कि एक बीमारी जैसी स्थिति है जो सही मदद से बिल्कुल ठीक हो सकती है।
डॉक्टर आदित्य सोनी के अनुसार, इसके कारण निम्न हो सकते हैं;
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
8 Jun 2026, 1:47 PM IST
Published on:
8 Jun 2026, 1:44 PM IST
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