
Occipital Neuralgia Symptoms: कई लोगों को सिरदर्द की शिकायत रहती है। लेकिन अगर दर्द गर्दन के पीछे से शुरू होकर सिर के ऊपरी हिस्से या आंखों के पीछे तक बिजली के झटके जैसा महसूस होता है, तो यह सामान्य सिरदर्द या माइग्रेन नहीं भी हो सकता। यह ऑक्सिपिटल न्यूराल्जिया नामक समस्या का संकेत हो सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ न्यूरोलॉजिकल सर्जन्स (AANS) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक (NINDS) के अनुसार, यह स्थिति तब होती है जब सिर के पीछे से गुजरने वाली ऑक्सिपिटल नसों (Occipital Nerves) में जलन, दबाव या चोट पहुंचती है।
ऑक्सिपिटल न्यूराल्जिया एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें सिर के पीछे की नसों में दर्द उत्पन्न होता है। यह दर्द अक्सर गर्दन के ऊपरी हिस्से से शुरू होकर सिर के पीछे, ऊपर और कभी-कभी आंखों के पीछे तक फैल सकता है। कई बार लोग इसे माइग्रेन या सामान्य सिरदर्द समझ लेते हैं, जिससे सही इलाज में देरी हो सकती है।
Cleveland Clinic के अनुसार, इसका सबसे प्रमुख लक्षण गर्दन के पीछे से शुरू होकर सिर तक जाने वाला तेज, चुभने वाला या बिजली के झटके जैसा दर्द है। दर्द एक तरफ या दोनों तरफ महसूस हो सकता है।
कुछ लोगों को बालों में कंघी करने, सिर छूने या तकिए पर सिर रखने तक में दर्द महसूस हो सकता है।
ऑक्सिपिटल न्यूराल्जिया का दर्द कभी-कभी आंखों के पीछे तक पहुंच सकता है, जिससे इसे माइग्रेन समझने की गलती हो सकती है।
AANS के अनुसार, कुछ मरीजों में तेज रोशनी से असहजता या आंखों में दर्द बढ़ सकता है।
माइग्रेन में अक्सर धड़कन जैसा दर्द, मतली और उल्टी हो सकती है, जबकि ऑक्सिपिटल न्यूराल्जिया में दर्द नस के रास्ते पर तेज, चुभने वाला या बिजली के झटके जैसा महसूस होता है। फिर भी दोनों स्थितियों के लक्षण कुछ हद तक मिल सकते हैं, इसलिए सही निदान जरूरी है।
यदि गर्दन से सिर तक बार-बार तेज दर्द जाता है, सिर छूने पर दर्द होता है या दर्द सामान्य दर्दनाशक दवाओं से ठीक नहीं हो रहा, तो न्यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना उचित है। NINDS के अनुसार, उपचार दर्द के कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। दवाएं, फिजियोथेरेपी, नसों को आराम देने वाली तकनीकें और कुछ मामलों में विशेष प्रक्रियाएं राहत दिलाने में मदद कर सकती हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।