Chronic Liver Disease: नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि मुंह के बैक्टीरिया गट हेल्थ बिगाड़कर क्रॉनिक लिवर डिजीज का खतरा बढ़ा सकते हैं। जानें कैसे।
Chronic Liver Disease: अक्सर हम सोचते हैं कि मुंह के बैक्टीरिया सिर्फ दांतों और मसूड़ों तक ही असर डालते हैं, लेकिन एक नई स्टडी ने बताया है कि यही बैक्टीरिया हमारी आंतों की सेहत और यहां तक कि लिवर की गंभीर बीमारियों के खतरे से भी जुड़े हो सकते हैं। हर साल दुनिया भर में करीब 20 लाख से ज्यादा लोगों की मौत एडवांस्ड क्रॉनिक लिवर डिजीज (ACLD) की वजह से होती है। ऐसे में यह शोध बेहद अहम माना जा रहा है।
Nature Microbiology नाम की जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी ऑफ म्यूनिख (TUM) के वैज्ञानिकों ने 86 मरीजों के मुंह (लार) और मल के सैंपल की जांच की। इसका मकसद यह समझना था कि लिवर की बीमारी बढ़ने के साथ शरीर के बैक्टीरिया में क्या बदलाव आते हैं।
शोध में पाया गया कि जैसे-जैसे लिवर की बीमारी गंभीर होती जाती है, वैसे-वैसे मुंह और आंतों के बैक्टीरिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। आमतौर पर स्वस्थ लोगों में मुंह और आंतों के बैक्टीरिया बिल्कुल अलग होते हैं, लेकिन लिवर की बीमारी वाले मरीजों में दोनों जगह के बैक्टीरिया धीरे-धीरे एक जैसे होने लगते हैं। यहां तक कि बीमारी के शुरुआती चरण में ही मुंह के बैक्टीरिया में बदलाव नजर आने लगता है, जबकि आंतों में बदलाव बाद में दिखता है। यह संकेत देता है कि मुंह की सेहत लिवर की बीमारी का शुरुआती इशारा हो सकती है।
इस अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर मेलानी शिर्मर के अनुसार, कुछ ऐसे बैक्टीरिया जो आमतौर पर सिर्फ मुंह में पाए जाते हैं, वे लिवर की गंभीर बीमारी वाले मरीजों की आंतों में बड़ी संख्या में मिलने लगे। इसका मतलब है कि ये बैक्टीरिया मुंह से आंतों तक पहुंचकर वहीं बस रहे हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जिन मरीजों के मल के सैंपल में इन बैक्टीरिया की मात्रा ज्यादा थी, उनमें आंतों की दीवार यानी गट बैरियर को नुकसान पहुंचने के संकेत भी मिले।
जीन जांच में सामने आया कि ये बैक्टीरिया ऐसे एंजाइम बनाते हैं जो कोलेजन को तोड़ देते हैं। कोलेजन आंतों की दीवार को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। जब यह टूटता है, तो आंतों की दीवार कमजोर हो जाती है और बैक्टीरिया या उनके जहरीले तत्व शरीर के दूसरे अंगों, खासकर लिवर तक पहुंच सकते हैं। इससे लिवर की बीमारी और बिगड़ सकती है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस खोज से इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं। आंतों की दीवार को मजबूत रखना और मुंह के बैक्टीरिया को नियंत्रित करना, लिवर की बीमारी की रफ्तार को धीमा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ओरल हेल्थ यानी मुंह की साफ-सफाई पर ध्यान देकर और गट हेल्थ सुधारकर लिवर की गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।