स्वास्थ्य

ब्रेन डेड अधिकारी के अंगदान से 68 साल के मरीज को मिला नया जीवन, जानिए Organ Donation क्यों है जरूरी

Brain Dead Organ Donation: दिल्ली में ब्रेन डेड अधिकारी के अंगदान से 68 वर्षीय मरीज को नया जीवन मिला। जानिए अंगदान कैसे कई लोगों की जिंदगी बदल सकता है और रिसर्च इसके बारे में क्या कहती है।

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Jun 06, 2026
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अंगदान की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- freepik)

Organ Donation India: किसी अपने को खोने का दुख शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है। लेकिन कुछ परिवार ऐसे फैसले लेते हैं जो अपने दुख के बीच भी किसी दूसरे की जिंदगी में उम्मीद की नई किरण जगा देते हैं। दिल्ली में एक पूर्व नगर निगम अधिकारी के परिवार ने ऐसा ही उदाहरण पेश किया है।

पूर्व अधिकारी को उनके घर पर स्ट्रोक (ब्रेन स्ट्रोक) आया था। उन्हें पहले नजदीकी अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए द्वारका स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की लगातार कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और 3 जून को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया

दुख के बीच लिया बड़ा फैसला

परिवार ने अपने प्रियजन को खोने के गम के बावजूद अंगदान (Organ Donation) के लिए सहमति दी। इस फैसले की बदौलत उनका लीवर एक 68 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किया गया, जबकि दोनों कॉर्निया (आंखों की पारदर्शी परत) दान कर दिए गए। एक व्यक्ति का अंगदान कई लोगों की जिंदगी बदल सकता है। यही वजह है कि दुनियाभर में अंगदान को जीवनदान के रूप में देखा जाता है।

क्या उम्र बढ़ने पर अंगदान नहीं किया जा सकता?

कई लोगों का मानना है कि ज्यादा उम्र होने पर अंगदान संभव नहीं होता, लेकिन डॉक्टर इससे सहमत नहीं हैं। अंगदान का फैसला उम्र नहीं बल्कि अंगों की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर लिया जाता है। यही कारण है कि इस मामले में भी वरिष्ठ आयु के व्यक्ति का लीवर सफलतापूर्वक दूसरे मरीज को प्रत्यारोपित किया जा सका।

रिसर्च क्या कहती है?

जर्नल ट्रांसप्लांटेशन और अमेरिकन जर्नल ऑफ ट्रांसप्लांटेशन में प्रकाशित कई अध्ययनों के अनुसार, बढ़ती उम्र के डोनर के अंग भी सही मूल्यांकन के बाद सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किए जा सकते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि अंगों की गुणवत्ता और मरीज की जरूरत को देखते हुए उम्र को अकेला मानदंड नहीं माना जाना चाहिए।

भारत में क्यों जरूरी है अंगदान?

दृष्टि आईएएस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल हजारों मरीज लीवर, किडनी, हृदय और कॉर्निया प्रत्यारोपण का इंतजार करते हैं। लेकिन अंगदान करने वालों की संख्या अभी भी बहुत कम है। राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, देश में हर साल 25,000 से 30,000 लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, जबकि वास्तविक संख्या इससे काफी कम है। इसी तरह कॉर्निया ट्रांसप्लांट की मांग भी उपलब्ध दान से कहीं अधिक है।

एक फैसला, कई जिंदगियां

यह घटना याद दिलाती है कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी किसी की मदद की जा सकती है। अंगदान सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं, बल्कि ऐसा मानवीय फैसला है जो किसी को नई जिंदगी, नई रोशनी और नई उम्मीद दे सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक होने की सलाह देते हैं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Published on:
06 Jun 2026 05:16 pm