
Paget's Disease of the Breast Hindi: ब्रेस्ट कैंसर का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के मन में सिर्फ स्तन में किसी गांठ (लंप) का ही ख्याल आता है। लेकिन हर बार ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआत किसी गांठ से ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार स्तन की त्वचा, विशेष रूप से निप्पल और उसके आसपास का हिस्सा ऐसे संकेत देने लगता है जिन्हें महिलाएं सामान्य त्वचा की एलर्जी या सूखापन समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। मेडिकल भाषा में ब्रेस्ट के इस दुर्लभ कैंसर को ब्रेस्ट की पैजेट्स डिजीज (Paget's Disease of the Breast) कहा जाता है। यह समस्या निप्पल की बाहरी त्वचा से शुरू होती है और इसके शुरुआती संकेतों को पहचानना बहुत जरूरी है ताकि समय रहते सही इलाज मिल सके।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, पैजेट्स डिजीज ब्रेस्ट कैंसर का एक दुर्लभ रूप है, जो सभी तरह के ब्रेस्ट कैंसर मामलों में से करीब 1 से 4 प्रतिशत में देखने को मिलता है। इस बीमारी में कैंसर कोशिकाएं सबसे पहले निप्पल की सतह और उसके आसपास के गहरे रंग वाले घेरे (एरिओला) की त्वचा को प्रभावित करती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन महिलाओं या पुरुषों को पैजेट्स डिजीज होती है, उनमें से लगभग 80 से 90 प्रतिशत मामलों में ब्रेस्ट के अंदर पहले से ही डक्टल कार्सिनोमा (Ductal Carcinoma) या कोई अन्य इनवेसिव कैंसर मौजूद होता है। यह कैंसर दूध बनाने वाली नलियों (मिल्क डक्ट्स) से होकर धीरे-धीरे निप्पल की ऊपरी त्वचा तक पहुंच जाता है।
यूके की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, पैजेट्स डिजीज के लक्षण अक्सर सिर्फ एक ही स्तन पर दिखाई देते हैं। शुरुआत में ये लक्षण एक्जिमा (Eczema) या डर्मेटाइटिस जैसे लगते हैं, जिसके कारण लोग इसे साधारण खुजली मान लेते हैं। अगर आपको अपने ब्रेस्ट में नीचे बताए गए बदलाव नजर आएं, तो तुरंत सतर्क हो जाएं;
बहुत सी महिलाएं महीनों तक इसे सामान्य एक्जिमा मानकर घरेलू नुस्खे आजमाती रहती हैं। दोनों में मुख्य अंतर यह है कि साधारण एक्जिमा आमतौर पर दोनों स्तनों और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी हो सकता है, जबकि पैजेट्स डिजीज 99 प्रतिशत मामलों में केवल एक ही ब्रेस्ट के निप्पल पर होती है। दूसरा बड़ा फर्क यह है कि पैजेट्स डिजीज में त्वचा के बदलाव पहले निप्पल से शुरू होकर धीरे-धीरे एरिओला तक फैलते हैं, जबकि आम स्किन एलर्जी अक्सर एरिओला से शुरू होकर निप्पल की तरफ बढ़ती है।
यदि निप्पल पर किसी भी तरह की पपड़ी, लाली या खुजली एक से दो हफ्तों के भीतर ठीक न हो, तो बिना किसी देरी के किसी ब्रेस्ट सर्जन या ऑन्कोलॉजिस्ट से जांच करवानी चाहिए। डॉक्टर सबसे पहले शारीरिक परीक्षण करते हैं। इसके बाद बीमारी की सही पहचान के लिए निम्नलिखित जांचें की जाती हैं;
यदि समय रहते पैजेट्स डिजीज की पहचान हो जाए, तो इसका सफल इलाज पूरी तरह संभव है। इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि स्तन के अंदरूनी हिस्से में कैंसर कितना फैला है, यदि कैंसर सिर्फ निप्पल और उसके आसपास सीमित है, तो केवल उस हिस्से को काटकर हटाया जाता है (ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी)। लेकिन अगर स्तन के अंदर भी बड़ी गांठ या कैंसर फैला हुआ है, तो पूरे ब्रेस्ट को हटाने की सर्जरी (मास्टेक्टॉमी) की जा सकती है। सर्जरी के बाद बची हुई कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए सिकाई (रेडिएशन) दी जाती है। यदि अंदरूनी ट्यूमर आक्रामक है या हार्मोन्स के प्रति संवेदनशील है, तो डॉक्टर दवाओं और इंजेक्शन के जरिए शरीर को कैंसर-मुक्त रखने का उपचार करते हैं।