
बच्चे का सिर सामान्य से बड़ा किस कारण से दिखता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Macrocephaly Hindi: छोटे बच्चे की हर छोटी-बड़ी गतिविधि और शारीरिक विकास पर माता-पिता की पैनी नजर रहती है। जन्म के बाद डॉक्टर नियमित रूप से बच्चे का वजन, लंबाई और सिर का घेरा (Head Circumference) नापते हैं। कई बार ऐसा होता है कि माता-पिता को लगता है कि उनके बच्चे का सिर बाकी बच्चों के मुकाबले थोड़ा बड़ा दिख रहा है, या डॉक्टर जांच के दौरान बताते हैं कि सिर का आकार ग्रोथ चार्ट में औसत से ऊपर जा रहा है। मेडिकल की भाषा में बच्चे के सिर के सामान्य से काफी बड़े होने की स्थिति को मैक्रोसेफली (Macrocephaly) कहा जाता है। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, हर बार सिर का बड़ा होना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन इसके कारणों को समय पर समझना और डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं कि ऐसा किस कारण से होता है?
एनसीबीआइ के मुताबिक, जब किसी नवजात या छोटे बच्चे के सिर की परिधि उसकी उम्र और लिंग के सामान्य मानक (97वें परसेंटाइल) से अधिक हो जाती है, तो उसे मैक्रोसेफली कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि बच्चे का सिर उसी उम्र के लगभग 97 प्रतिशत बच्चों के सिर से बड़ा है। यह कोई अकेली बीमारी नहीं है, बल्कि एक शारीरिक लक्षण है जो कई अलग-अलग वजहों से सामने आ सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, मैक्रोसेफली के पीछे कई तरह के कारण हो सकते हैं;
अगर आपको बच्चे का सिर असामान्य लगे, तो सबसे पहले अपने पीडियाट्रिशियन (शिशु रोग विशेषज्ञ) से मिलें। डॉक्टर सबसे पहले एक लचीले फीते से बच्चे के सिर का सही नाप लेते हैं और पिछले रिकॉर्ड से उसका मिलान करते हैं। अगर सिर बहुत तेजी से बढ़ रहा है, तो डॉक्टर अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन (CT Scan) या एमआरआई (MRI) कराने की सलाह दे सकते हैं, ताकि खोपड़ी के अंदरूनी हिस्से, दिमाग और तरल की स्थिति साफ देखी जा सके।
मैक्रोसेफली का इलाज पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि सिर बड़ा होने की असली वजह क्या है। अगर कारण पारिवारिक है, तो किसी भी दवा या इलाज की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर बस समय-समय पर बच्चे के विकास पर नजर रखते हैं। हाइड्रोसिफैलस (पानी भरना) है तो न्यूरोसर्जन खोपड़ी में बने अतिरिक्त तरल को बाहर निकालने के लिए एक पतली ट्यूब डालते हैं, जिसे शंट (Shunt) कहा जाता है। यह ट्यूब अतिरिक्त पानी को पेट के हिस्से में सुरक्षित रूप से बहा देती है, जिससे दिमाग पर दबाव घट जाता है। यदि बच्चे को शारीरिक गतिविधियों या बोलने में थोड़ी देरी हो रही है, तो फिजिकल थेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी से बच्चे को सामान्य जीवन जीने में पूरी मदद मिलती है।
Updated on:
26 Sept 2026 12:31 pm
Published on:
26 Sept 2026 12:30 pm
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