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Kallmann Syndrome: समय पर शुरू न हो Puberty तो न करें नजरअंदाज, नेचर रिसर्च से समझें कॉलमैन सिंड्रोम के लक्षण

Kallmann Syndrome Hindi: समय पर Puberty (किशोरावस्था) के लक्षण न दिखना केवल कमजोरी नहीं, बल्कि Kallmann Syndrome का संकेत हो सकता है। Cleveland Clinic और Nature की रिपोर्ट के आधार पर जानें इसके लक्षण, कारण और इलाज।
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भारत

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Nidhi Yadav

•

Sep 26, 2026

delayed or absent puberty linked to Kallmann syndrome and sense of smell issue

Kallmann syndrome क्या होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Kallmann Syndrome Cause: बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में किशोरावस्था (Puberty) एक बहुत ही महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। आमतौर पर लड़कियों में 8 से 13 साल और लड़कों में 9 से 14 साल की उम्र के बीच शरीर में प्राकृतिक बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। लेकिन कई बार उम्र बढ़ने के बावजूद बच्चों में प्यूबर्टी के लक्षण दिखाई नहीं देते। अक्सर माता-पिता इसे शारीरिक कमजोरी या 'देर से विकास होना' मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मेडिकल भाषा में समय पर प्यूबर्टी न आने के पीछे एक दुर्लभ स्थिति हो सकती है, जिसे कॉलमैन सिंड्रोम (Kallmann Syndrome) कहा जाता है। यह एक जेनेटिक यानी आनुवंशिक स्थिति है जो शरीर के हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करती है। आइए इसे समझते हैं।

कॉलमैन सिंड्रोम (Kallmann Syndrome) क्या है?

नेचर रिसर्च के अनुसार, कॉलमैन सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार (Genetic Condition) है जो शरीर में प्यूबर्टी लाने वाले मुख्य हार्मोन्स को बनने से रोकता है। हमारे दिमाग का एक हिस्सा होता है जिसे 'हाइपोथैलेमस' (Hypothalamus) कहते हैं। यह हिस्सा GnRH (Gonadotropin-Releasing Hormone) नाम का एक महत्वपूर्ण हार्मोन जारी करता है। यह हार्मोन शरीर के जननांगों (Testes और Ovaries) को संकेत देता है कि वे एस्ट्रोजन या टेस्टोस्टेरोन जैसे सेक्स हार्मोन्स बनाएं, जिससे प्यूबर्टी के बदलाव आते हैं। कॉलमैन सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में यह हार्मोन या तो बनता ही नहीं या सही तरीके से काम नहीं करता। नतीजतन, प्यूबर्टी या तो बहुत देर से आती है या बिल्कुल नहीं आती।

कॉलमैन सिंड्रोम का सबसे अनोखा लक्षण: सूंघने की क्षमता न होना

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, इस सिंड्रोम की सबसे खास और अलग पहचान यह है कि इससे पीड़ित व्यक्ति में सूंघने की शक्ति (Sense of Smell) या तो बहुत कम होती है या बिल्कुल नहीं होती (मेडिकल भाषा में इसे Anosmia कहते हैं)। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भ्रूण (foetus) के विकास के दौरान मस्तिष्क में जो नसें सूंघने की क्षमता के लिए जिम्मेदार होती हैं, वही नसें GnRH हार्मोन बनाने वाले न्यूरॉन्स के साथ विकसित होती हैं। जब इनमें कोई आनुवंशिक रुकावट आती है, तो सूंघने की क्षमता और हार्मोनल विकास दोनों प्रभावित हो जाते हैं।

लड़कों में इसके मुख्य लक्षण और संकेत क्या हैं?

  • 14-15 साल की उम्र के बाद भी आवाज का भारी न होना।
  • चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ न आना और शरीर पर बालों का विकास न होना।
  • मांसपेशियों और हड्डियों का सामान्य से कमजोर रहना।
  • जननांगों (Penis और Testes) का आकार छोटा रहना।

लड़कियों में इसके मुख्य लक्षण

  • 15-16 साल की उम्र तक भी पीरियड्स (मासिक धर्म) का शुरू न होना।
  • ब्रेस्ट का विकास न होना।
  • किसी भी चीज की गंध (खुशबू या बदबू) न महसूस होना।
  • किशोरावस्था में सामान्य से ज्यादा लंबाई बढ़ना (क्योंकि हड्डियों की प्लेट्स समय पर बंद नहीं होतीं)।
  • कुछ मामलों में होंठ या तालू में कट होना (Cleft lip/palate) या एक ही किडनी का होना।

यह क्यों होता है और किसे ज्यादा खतरा है?

  • कॉलमैन सिंड्रोम मुख्य रूप से जीन में खराबी (Mutation) के कारण होता है।
  • यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में आनुवंशिक रूप से स्थानांतरित हो सकती है।
  • लड़कों में यह समस्या लड़कियों की तुलना में लगभग 4 गुना अधिक पाई जाती है।
  • कई मामलों में परिवार में किसी को यह बीमारी न होने के बावजूद भी बच्चे में नया जीन म्यूटेशन हो सकता है।

जांच और इलाज (Diagnosis & Treatment)

यदि 14-15 साल की उम्र के बाद भी बच्चे में प्यूबर्टी के कोई लक्षण न दिखें और उसे सूँघने में समस्या हो, तो तुरंत एंडोक्रोलॉजिस्ट (Hormone Specialist) से परामर्श करना चाहिए। डॉक्टर ब्लड टेस्ट के जरिए हार्मोन्स का स्तर मापते हैं और दिमाग का MRI स्कैन करके सूँघने वाली नसों की स्थिति देखते हैं। इसका मुख्य इलाज हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) है। लड़कों को टेस्टोस्टेरोन और लड़कियों को एस्ट्रोजन/प्रोजेस्टेरोन के इंजेक्शन या सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं। सही समय पर इलाज शुरू होने से शरीर में प्यूबर्टी के सारे स्वाभाविक बदलाव आ जाते हैं और आगे चलकर प्रजनन क्षमता (Fertility) को भी बेहतर बनाया जा सकता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।