
Kallmann syndrome क्या होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Kallmann Syndrome Cause: बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में किशोरावस्था (Puberty) एक बहुत ही महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। आमतौर पर लड़कियों में 8 से 13 साल और लड़कों में 9 से 14 साल की उम्र के बीच शरीर में प्राकृतिक बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। लेकिन कई बार उम्र बढ़ने के बावजूद बच्चों में प्यूबर्टी के लक्षण दिखाई नहीं देते। अक्सर माता-पिता इसे शारीरिक कमजोरी या 'देर से विकास होना' मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन मेडिकल भाषा में समय पर प्यूबर्टी न आने के पीछे एक दुर्लभ स्थिति हो सकती है, जिसे कॉलमैन सिंड्रोम (Kallmann Syndrome) कहा जाता है। यह एक जेनेटिक यानी आनुवंशिक स्थिति है जो शरीर के हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करती है। आइए इसे समझते हैं।
नेचर रिसर्च के अनुसार, कॉलमैन सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार (Genetic Condition) है जो शरीर में प्यूबर्टी लाने वाले मुख्य हार्मोन्स को बनने से रोकता है। हमारे दिमाग का एक हिस्सा होता है जिसे 'हाइपोथैलेमस' (Hypothalamus) कहते हैं। यह हिस्सा GnRH (Gonadotropin-Releasing Hormone) नाम का एक महत्वपूर्ण हार्मोन जारी करता है। यह हार्मोन शरीर के जननांगों (Testes और Ovaries) को संकेत देता है कि वे एस्ट्रोजन या टेस्टोस्टेरोन जैसे सेक्स हार्मोन्स बनाएं, जिससे प्यूबर्टी के बदलाव आते हैं। कॉलमैन सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में यह हार्मोन या तो बनता ही नहीं या सही तरीके से काम नहीं करता। नतीजतन, प्यूबर्टी या तो बहुत देर से आती है या बिल्कुल नहीं आती।
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, इस सिंड्रोम की सबसे खास और अलग पहचान यह है कि इससे पीड़ित व्यक्ति में सूंघने की शक्ति (Sense of Smell) या तो बहुत कम होती है या बिल्कुल नहीं होती (मेडिकल भाषा में इसे Anosmia कहते हैं)। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि भ्रूण (foetus) के विकास के दौरान मस्तिष्क में जो नसें सूंघने की क्षमता के लिए जिम्मेदार होती हैं, वही नसें GnRH हार्मोन बनाने वाले न्यूरॉन्स के साथ विकसित होती हैं। जब इनमें कोई आनुवंशिक रुकावट आती है, तो सूंघने की क्षमता और हार्मोनल विकास दोनों प्रभावित हो जाते हैं।
यदि 14-15 साल की उम्र के बाद भी बच्चे में प्यूबर्टी के कोई लक्षण न दिखें और उसे सूँघने में समस्या हो, तो तुरंत एंडोक्रोलॉजिस्ट (Hormone Specialist) से परामर्श करना चाहिए। डॉक्टर ब्लड टेस्ट के जरिए हार्मोन्स का स्तर मापते हैं और दिमाग का MRI स्कैन करके सूँघने वाली नसों की स्थिति देखते हैं। इसका मुख्य इलाज हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) है। लड़कों को टेस्टोस्टेरोन और लड़कियों को एस्ट्रोजन/प्रोजेस्टेरोन के इंजेक्शन या सप्लीमेंट्स दिए जाते हैं। सही समय पर इलाज शुरू होने से शरीर में प्यूबर्टी के सारे स्वाभाविक बदलाव आ जाते हैं और आगे चलकर प्रजनन क्षमता (Fertility) को भी बेहतर बनाया जा सकता है।
Updated on:
26 Sept 2026 11:32 am
Published on:
26 Sept 2026 11:31 am
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