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Quadrantanopia: सिर्फ आंखों की बीमारी नहीं, दिमाग की समस्या से भी जा सकती है नजर के एक हिस्से की रोशनी, साइंसडायरेक्ट से जानें कारण

Quadrantanopia Cause: आंखों की नहीं, बल्कि दिमाग की गड़बड़ी से भी गायब हो सकती है एक चौथाई नजर। क्लीवलैंड क्लिनिक और साइंसडायरेक्ट की रिपोर्ट्ससे जानें क्या है क्वाड्रेंटेनोपिया (Quadrantanopia), इसके गंभीर कारण, रोजमर्रा के लक्षण और बचाव की पूरी जानकारी।
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भारत

•

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Nidhi Yadav

•

Sep 26, 2026

Medical diagram illustrating quadrantanopia visual field defect caused by brain visual pathway damage

नजर के एक हिस्से की रोशनी जाने के पीछे ये कारण हो सकता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- freepik)

Quadrantanopia Symptoms: अक्सर जब भी किसी इंसान को धुंधला दिखाई देने लगता है या नजर कमजोर होने लगती है, तो सबसे पहला ख्याल यही आता है कि आंखों का नंबर बढ़ गया है या मोतियाबिंद जैसी कोई समस्या हो गई है। हम तुरंत चश्मा बदलने या आई ड्रॉप्स डालने की सोचने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार नजर का कमजोर होना आंखों की खराबी की वजह से नहीं, बल्कि दिमाग के अंदरूनी हिस्से में आई किसी गंभीर रुकावट के कारण होता है? हमारी आंखें केवल कैमरा हैं, मगर जो तस्वीर हम देखते हैं, उसे प्रोसेस करने और दिखाने का असली काम हमारा दिमाग करता है। जब दिमाग के देखने वाले हिस्से (विजुअल पाथवे) में कोई चोट, स्ट्रोक या बीमारी लग जाती है, तो इंसान की देखने की क्षमता का एक चौथाई हिस्सा अचानक गायब हो सकता है। मेडिकल साइंस में इस स्थिति को क्वाड्रेंटेनोपिया (Quadrantanopia) कहा जाता है। यह कोई साधारण आंखों की परेशानी नहीं, बल्कि दिमाग से जुड़ी एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या है। आइए जानते हैं कि इसके लक्षण और कारण क्या हैं?

क्वाड्रेंटेनोपिया आखिर क्या बीमारी है?

साइंसडायरेक्ट की रिपोर्ट्स के अनुसार, जब आप सीधी नजर रखते हैं, तो आपकी आंखें सामने के साथ-साथ ऊपर, नीचे, दाएं और बाएं के पूरे दायरे को देख पाती हैं। इसे 'विजुअल फील्ड' यानी नजर का दायरा कहते हैं। यदि इस दायरे को चार बराबर हिस्सों (चार चौकोर खानों) में बांट दिया जाए, तो उनमें से किसी एक चौथाई हिस्से का बिल्कुल काला हो जाना या नजर न आना ही क्वाड्रेंटेनोपिया कहलाता है।

इसमें आंख की पुतली या लेंस में कोई खराबी नहीं होती, बल्कि आंख से दिमाग तक विजुअल सिग्नल ले जाने वाले नसों के नेटवर्क में कोई रुकावट आ जाती है। यह समस्या एक आंख या दोनों आंखों को प्रभावित कर सकती है। यदि दोनों आंखों में एक ही तरफ का ऊपरी या निचला हिस्सा गायब होता है, तो इसे होमोनिमस क्वाड्रेंटेनोपिया कहते हैं।

दिमाग की कौन-सी समस्याओं से चली जाती है यह रोशनी?

क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, क्वाड्रेंटेनोपिया पैदा होने के मुख्य कारण हमारे सिर और दिमाग से जुड़े होते हैं;

रोजमर्रा की जिंदगी में इसके लक्षण कैसे पहचानें?

इस बीमारी की सबसे अजीब बात यह है कि शुरुआत में मरीज को खुद भी पता नहीं चलता कि उसकी नजर का एक हिस्सा कट चुका है, क्योंकि दिमाग खाली जगह को खुद-ब-खुद भरने की कोशिश करता है। लेकिन रोज के कामों में कुछ खास संकेत दिखने लगते हैं;

  • चीजों या लोगों से बार-बार टकराना।
  • किताब या अखबार पढ़ने में भारी दिक्कत।
  • गाड़ी चलाने में भारी खतरा।
  • सामान ढूंढ़ने में परेशानी।
  • सिरदर्द, चक्कर आना या आंखों के सामने बार-बार खालीपन महसूस होना।

ऊपरी या निचला हिस्सा गायब होना क्या संकेत देता है?

मेडिकल जांच के दौरान डॉक्टर यह देखते हैं कि रोशनी ऊपर की गई है या नीचे की, यदि नजर के ऊपर का चौथाई कोना गायब है, तो इसका मतलब है कि दिमाग का टेम्पोरल लोब (कान के ऊपर का हिस्सा) प्रभावित हुआ है। नजर के नीचे का चौथाई कोना नहीं दिख रहा, तो दिमाग के पैराइटल लोब (सिर के ऊपरी पिछले हिस्से) में समस्या हो सकती है।

डॉक्टर से कब मिलें और इसका इलाज क्या है?

अगर आपको या आपके परिवार में किसी को अचानक ऐसा लगे कि नजर का कोई कोना नहीं दिख रहा है, तो इसे बिल्कुल भी साधारण न समझें। यह किसी दबे-छुपे ब्रेन स्ट्रोक या ट्यूमर की निशानी हो सकता है। डॉक्टर विजुअल फील्ड टेस्ट (पेरीमेट्री) करवाते हैं, जिससे नजर के खोए हुए हिस्से का सटीक नक्शा बन जाता है। इसके साथ ही दिमाग की तुरंत एमआरआई (MRI) या सीटी स्कैन कराई जाती है ताकि असली बीमारी का पता चल सके। इसका इलाज इस बात पर टिका होता है कि दिमाग को क्या नुकसान हुआ है। यदि स्ट्रोक है तो खून के थक्के को घोलने की दवाएं दी जाती हैं, और यदि ट्यूमर है तो सर्जरी या रेडिएशन किया जाता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।