स्वास्थ्य

Pancreatic Neuroendocrine Tumor: पेट दर्द, वजन कम होना और पीलिया को न करें नजरअंदाज, हो सकता है पैंक्रियाटिक न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर

पेट दर्द, वजन कम होना और पीलिया Pancreatic Neuroendocrine Tumor के लक्षण हो सकते हैं। जानिए इसके कारण, प्रकार और सही समय पर इलाज के उपाय।
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Sep 30, 2026
pancreas highlighting neuroendocrine tumor with related symptoms
वजन कम होना और पीलिया Pancreatic Neuroendocrine Tumor का संकेत हो सकता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Pancreatic Neuroendocrine Tumor: अक्सर पेट में हल्का-फुल्का दर्द होना, बिना किसी डाइटिंग के अचानक वजन घटने लगना या फिर आंखों और त्वचा में पीलापन आ जाना जैसी समस्याओं को हम गैस्ट्रिक, गैस या सामान्य कमजोरी समझकर टाल देते हैं। बाजार से कोई एंटासिड या गैस की दवा खाकर हम सोच लेते हैं कि सब ठीक हो जाएगा। लेकिन अगर ये लक्षण बार-बार लौट रहे हैं या लंबे समय से बने हुए हैं, तो इन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मेडिकल की दुनिया में यह स्थिति पैंक्रियाज यानी अग्न्याशय से जुड़ी एक खास और दुर्लभ बीमारी का संकेत हो सकती है, जिसे पैंक्रियाटिक न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (Pancreatic Neuroendocrine Tumor - pNETs) कहा जाता है। आइए समझते हैं कि यह ट्यूमर क्या होता है, इसके लक्षण कैसे पहचानें और समय रहते इसका पता लगाना क्यों जरूरी है।

क्या होता है Pancreatic Neuroendocrine Tumor?

मेयो क्लिनिक के मुताबिक, पेट के ऊपरी हिस्से में पीछे की तरफ एक अंग होता है जिसे पैंक्रियाज (अग्न्याशय) कहते हैं। इसका काम शरीर के लिए पाचक रस बनाना और इंसुलिन जैसे जरूरी हार्मोन्स का रिसाव करना होता है जो हमारे ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखते हैं। अग्न्याशय के अंदर कुछ खास तरह की न्यूरोएंडोक्राइन कोशिकाएं (Neuroendocrine Cells) होती हैं, जो नर्वस सिस्टम से सिग्नल लेकर शरीर में हार्मोन्स बनाने और उन्हें खून में रिलीज करने का काम करती हैं। जब इन कोशिकाओं में अनियंत्रित तरीके से गांठ या ट्यूमर बनने लगता है, तो इसे 'पैंक्रियाटिक न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' कहते हैं। ये ट्यूमर दो तरह के हो सकते हैं;

  • फंक्शनल ट्यूमर (Functional Tumors)- ये ट्यूमर शरीर में जरूरत से ज्यादा हार्मोन्स बनाने लगते हैं, जिससे बहुत जल्दी अलग-अलग तरह के अजीब लक्षण दिखने लगते हैं।
  • नॉन-फंक्शनल ट्यूमर (Non-functional Tumors)- ये ट्यूमर कोई अतिरिक्त हार्मोन नहीं बनाते। इसलिए ये लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ते रहते हैं और जब आकार में काफी बड़े हो जाते हैं, तब दबाव के कारण दर्द पैदा करते हैं।

इसके मुख्य लक्षण जिन्हें पहचानना जरूरी है

क्लीवलैंड क्लिनिक का कहना है कि जब यह ट्यूमर बढ़ता है या हार्मोन्स का असंतुलन पैदा करता है, तो शरीर में कई तरह के संकेत दिखने लगते हैं;

  • पेट या पीठ में लगातार दर्द।
  • बिना वजह वजन कम होना।
  • पीलिया (Jaundice)।
  • ब्लड शुगर का अचानक घटना या बढ़ना।
  • बार-बार पेट में अल्सर और एसिडिटी।
  • त्वचा पर लाल चकत्ते या खुजली।

यह ट्यूमर क्यों होता है और किसे है ज्यादा खतरा?

वैसे तो ज्यादातर मामलों में यह ट्यूमर बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक विकसित हो जाता है। लेकिन कुछ जेनेटिक और आनुवंशिक स्थितियां ऐसी हैं जो इसके खतरे को बढ़ा देती हैं, जैसे कि मल्टीपल एंडोक्राइन नियोप्लासिया टाइप 1 (MEN1)। अगर परिवार में किसी को यह जेनेटिक समस्या रही हो, तो अगली पीढ़ी में इस ट्यूमर के पनपने का जोखिम अधिक रहता है। इसके अलावा बढ़ती उम्र भी इसका एक बड़ा कारक है।

इसकी जांच और इलाज कैसे संभव है?

अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से पेट में दर्द, पीलिया या वजन घटने की दिक्कत है, तो डॉक्टर कुछ जरूरी टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं:

  • इमेजिंग टेस्ट- पेट का सीटी स्कैन (CT Scan), एमआरआई (MRI) या पीईटी स्कैन (PET Scan) करके अग्न्याशय में बनी गांठ का सही आकार और लोकेशन पता की जाती है।
  • ब्लड और यूरीन टेस्ट- खून में हार्मोन्स और खास क्रोमोग्रानिन-ए (Chromogranin A) जैसे प्रोटीन्स के लेवल की जांच की जाती है।
  • बायोप्सी- एक छोटी सी सुई के जरिए ट्यूमर का सैंपल लेकर लैब में जांच की जाती है ताकि यह पता चल सके कि ट्यूमर कितना आक्रामक है।

इलाज के तरीके क्या-क्या हैं?

इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर का साइज कितना है और वह कितना फैला है। अगर ट्यूमर शुरुआती स्टेज में है और एक ही जगह पर है, तो ऑपरेशन (Surgery) करके ट्यूमर को बाहर निकाल दिया जाता है। हार्मोन्स के रिसाव को रोकने और ट्यूमर की ग्रोथ को धीमा करने के लिए खास तरह के इंजेक्शन और दवाएं दी जाती हैं। अगर ट्यूमर शरीर के अन्य हिस्सों (जैसे लिवर) तक फैल चुका हो, तो इसे कंट्रोल करने के लिए एडवांस्ड थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
30 Sept 2026 05:08 pm