Menstrual Blood Test: नई रिसर्च के मुताबिक पीरियड ब्लड सिर्फ शरीर का वेस्ट नहीं है। इससे डायबिटीज, कैंसर और गर्भाशय से जुड़ी बीमारियों का शुरुआती संकेत मिल सकता है।
Menstrual Blood Test: अक्सर पीरियड के दौरान निकलने वाले खून को लोग शरीर का बेकार हिस्सा समझते हैं, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि पीरियड ब्लड महिलाओं की सेहत के बारे में कई अहम जानकारी दे सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसमें ऐसे संकेत (बायोमार्कर) होते हैं, जिनसे डायबिटीज, कैंसर और दूसरी बीमारियों का जल्दी पता लगाया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पीरियड ब्लड की जांच से गर्भाशय यानी यूटेरस से जुड़ी कई समस्याओं के बारे में जानकारी मिल सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम तौर पर गर्भाशय की सेहत को बिना सर्जरी या टेस्ट के समझना मुश्किल होता है, लेकिन पीरियड ब्लड इस काम को आसान बना सकता है।
एक स्टडी में पाया गया कि पीरियड ब्लड के जरिए ब्लड शुगर लेवल की जांच भी संभव है। रिसर्च में करीब 172 महिलाओं को शामिल किया गया, जिनमें कुछ स्वस्थ थीं और कुछ को डायबिटीज थी। स्टडी में देखा गया कि पीरियड ब्लड में मौजूद HbA1c स्तर सामान्य ब्लड टेस्ट के परिणामों से काफी हद तक मेल खाते हैं। HbA1c वह टेस्ट होता है जिससे पिछले तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर का पता चलता है। इसका मतलब है कि भविष्य में महिलाएं बिना सुई चुभाए भी अपने ब्लड शुगर की निगरानी कर सकती हैं।
पीरियड ब्लड में कुछ ऐसे बायोमार्कर भी होते हैं जो कैंसर के शुरुआती संकेत बता सकते हैं। उदाहरण के लिए, HPV वायरस की मौजूदगी से सर्वाइकल कैंसर का खतरा पता चल सकता है। इसके अलावा CA-125 जैसे मार्कर एंडोमेट्रियल कैंसर का संकेत दे सकते हैं। कुछ नई तकनीकों में ऐसे स्मार्ट पैड भी विकसित किए जा रहे हैं, जो रंग बदलकर या मोबाइल ऐप के जरिए इन संकेतों की जानकारी दे सकते हैं।
पीरियड ब्लड गर्भाशय के अंदर होने वाले बदलावों को भी दिखाता है। इसमें हार्मोन, सूजन और शरीर की दूसरी प्रक्रियाओं के संकेत मिलते हैं। जैसे एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी में एक खास प्रोटीन HMGB1 बढ़ जाता है। अगर पीरियड ब्लड की जांच की जाए तो इस बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता चल सकता है, भले ही अभी कोई लक्षण न दिख रहे हों।
पीरियड ब्लड की जांच का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह नॉन-इनवेसिव तरीका है। यानी इसमें सुई, दर्द या जटिल प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती। महिलाएं पैड, टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप की मदद से आसानी से सैंपल दे सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में यह तकनीक आम हो जाती है तो महिलाएं घर बैठे ही अपनी सेहत की निगरानी कर सकेंगी। इससे बीमारियों का जल्दी पता चलेगा और समय पर इलाज शुरू किया जा सकेगा।