
Phone Screen Headache: आज के समय में फोन हम सबकी जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन चुका है कि इसके बिना एक मिनट भी गुजारा नहीं होता। सुबह आंख खुलते ही सबसे पहले हम फोन चेक करते हैं और रात को सोते समय भी आखरी चीज फोन ही होती है।
नेशनल हेडेक इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, माइग्रेन सबसे आम सिरदर्दों में से भी एक है, जो दुनिया भर में लगभग 12 प्रतिशत लोगों को प्रभावित करता है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। हैरानी की बात है कि जरूरत से ज्यादा फोन चलाना हमारे सिरदर्द और माइग्रेन की वजह हो सकता है। आइए जानते हैं कि मोबाइल फोन का हमारे सिर दर्द से क्या संबंध है?
जब हम लगातार फोन की स्क्रीन को एकटक देखते रहते हैं, तो हम अपनी पलकें झपकाना भूल जाते हैं। इससे आंखों में सूखापन आने लगता है और आंखों पर बहुत ज्यादा जोर पड़ता है। हमारी आंखों की नसें सीधे दिमाग से जुड़ी होती हैं। जब आंखों पर बहुत ज्यादा लोड पड़ता है, तो दिमाग की नसें भी खिंचने लगती हैं और यही खिंचाव आगे चलकर सिरदर्द या माइग्रेन बन जाता है।
जब भी हम फोन देखते हैं, तो अपनी गर्दन को नीचे की तरफ झुका लेते हैं। घंटों इसी पोजीशन में रहने की वजह से हमारी गर्दन और कंधों की नसें और हड्डियां पूरी तरह अकड़ जाती हैं। मेडिकल भाषा में इसे टेक्स्ट नेक कहते हैं। गर्दन की यह जकड़न धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ती है और सिर के पिछले हिस्से में तेज दर्द पैदा कर देती है। कई बार हमें लगता है कि दर्द सिर में है, जबकि उसकी असली जड़ हमारी झुकी हुई गर्दन होती है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (PMC) के अनुसार, मोबाइल फोन के उपयोग के दौरान या बाद में सिरदर्द, नींद संबंधी विकार, भूलने की बीमारी, चक्कर आना और सिर और कान में जलन जैसी समस्याएं होती हैं। जो लोग बहुत ज्यादा फोन इस्तेमाल करते हैं, उन्हें सिरदर्द या माइग्रेन के दौरे बहुत जल्दी-जल्दी पड़ते हैं और उनका दर्द ज्यादा देर तक रहता है। रात को फोन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे दिमाग को सोने नहीं देती। इससे हमारी नींद अधूरी रह जाती है। रिसर्च कहती है कि नींद पूरी न होने की वजह से अगले दिन शरीर थका रहता है और सिर में भयंकर दर्द शुरू हो जाता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।