
Physiotherapy Benefits In Hindi: अक्सर जब हम फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) का नाम सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में फ्रैक्चर, प्लास्टर या किसी बड़े एक्सीडेंट के बाद की तस्वीरें आने लगती हैं। हमें लगता है कि यह तो सिर्फ गंभीर चोट लगने के बाद हड्डियों को ठीक करने या शरीर को वापस पटरी पर लाने के लिए होती है। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ऐसा बिल्कुल नहीं है।
आजकल लैपटॉप पर घंटों बैठे रहने या गलत तरीके से सोने की वजह से पीठ, कमर और गर्दन में दर्द होना आम बात हो गई है। फिजियोथेरेपी में कुछ ऐसी खास एक्सरसाइज और तरीके होते हैं जो आपकी मांसपेशियों के खिंचाव को ठीक करते हैं और आपको इस दर्द से बिना दवा के आराम दिलाते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ या गठिया (आर्थराइटिस) की वजह से जब घुटनों, कंधों या हाथों के जोड़ों में जकड़न होने लगती है, तो चलना-फिरना भी भारी हो जाता है। फिजियोथेरेपिस्ट जोड़ों की मूवमेंट को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे जकड़न कम होती है और आप बिना तकलीफ के चल-फिर पाते हैं।
सुनकर थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन अस्थमा (Asthma) या सीओपीडी (COPD) जैसी सांस की बीमारियों में भी फिजियोथेरेपी बहुत असरदार है। इसके तहत आपको खास ब्रीदिंग एक्सरसाइज (सांस लेने के तरीके) सिखाई जाती हैं, जो आपके फेफड़ों को मज़बूत बनाती हैं और अंदर जमा कफ को बाहर निकालने में मदद करती हैं।
अगर किसी को स्ट्रोक (लकवा) आया हो या नसों से जुड़ी कोई और समस्या हो, तो शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और हाथ-पैर सही से काम नहीं करते। ऐसे में फिजियोथेरेपी मांसपेशियों को दोबारा एक्टिव करने और शरीर का बैलेंस वापस लाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है।
अगर किसी की दिल की सर्जरी हुई है या दिल से जुड़ी कोई पुरानी बीमारी है, तो शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। ऐसे मरीजों के लिए धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से शारीरिक ताकत वापस पाने के लिए फिजियोथेरेपी की मदद ली जाती है ताकि दिल पर दबाव भी न पड़े और शरीर एक्टिव हो जाए।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई बदलाव आते हैं, जिससे पीठ और कमर के निचले हिस्से में काफी दर्द रहता है। फिजियोथेरेपी महिलाओं की मांसपेशियों को सुरक्षित तरीके से मजबूत बनाती है, जिससे डिलीवरी के पहले और बाद का सफर थोड़ा आसान हो जाता है।
अक्सर बुजुर्गों में कमजोरी या चक्कर आने की वजह से पैर डगमगाने लगते हैं और गिरने का डर बना रहता है। फिजियोथेरेपी बुजुर्गों की मांसपेशियों को ताकत देती है और उनका बैलेंस बेहतर करती है, जिससे वे बिना किसी सहारे के आत्मविश्वास के साथ चल पाते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।