
Allergy vs Cold: गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही हवा में घुलती धुंध (स्मॉग) और गिरता तापमान अपने साथ सेहत की ढेरों चुनौतियां लेकर आता है। इन दिनों अस्पताल की ओपीडी (OPD) से लेकर घर-घर तक एक ही आवाज सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है धंसका और लगातार उठती खांसी। कोई इसे आम सर्दी-जुकाम मानकर घरेलू नुस्खे आजमा रहा है, तो कोई इसे लगातार सीने में दबाए घूम रहा है। लेकिन एक क्लिनिकल इमरजेंसी नर्सिंग एक्सपर्ट के तौर पर मेरा अनुभव कहता है कि बदलते मौसम और वायु प्रदूषण के इस कॉम्बिनेशन में खांसी को मामूली समझना भारी पड़ सकता है। प्रदूषण में मौजूद हानिकारक कण और तापमान का अचानक गिरना हमारे श्वसन तंत्र को सीधे निशाना बनाते हैं। आइए समझते हैं कि आखिर इस मौसम में फेफड़े क्यों चिल्लाते हैं और एलर्जी, वायरल संक्रमण व खतरे के संकेतों की पहचान कैसे करें।
मौसम बदलने और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बिगड़ने पर हवा में सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10), धूल, परागकण (pollen) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों की मात्रा काफी बढ़ जाती है। जब हम इस प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, तो ये कण हमारे श्वसन मार्ग (Airways) की अंदरूनी परत में जलन और सूजन पैदा कर देते हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, हवा के प्रदूषक तत्व और सिगरेट/पराली का धुआं हमारी वायु नलिकाओं के नर्वस सिस्टम (न्यूरॉन्स) को अत्यधिक संवेदनशील बना देते हैं। इससे छोटी सी उत्तेजना पर भी गले में तेज धंसका उठने लगता है। ठंडी और शुष्क (dry) हवा श्वसन मार्ग की प्राकृतिक नमी को सुखा देती है। इससे गले में खराश बढ़ती है और शरीर बलगम (mucus) बनाकर इसे साफ करने की कोशिश करता है, जिससे खांसी का दौरा बार-बार आता है।
अक्सर लोग वायरल इनफेक्शन और एलर्जी की खांसी के बीच अंतर नहीं समझ पाते, जिससे इलाज में देरी होती है। इनकी पहचान इन अंतरों से की जा सकती है;
सांस संबंधी परेशानियों से बचने के लिए दैनिक दिनचर्या में ये व्यावहारिक बदलाव करें;
साइंस डायरेक्ट के अनुसार, जब भी बाहर निकलें, साधारण कपड़े के मास्क की जगह N95 या FFP2 मास्क का इस्तेमाल करें। यह महीन प्रदूषक कणों को फेफड़ों तक जाने से रोकता है। जब AQI बहुत खराब हो, तो तड़के (Early morning) वॉक पर जाने से बचें। इस समय स्मॉग जमीन के करीब रहता है। धूप निकलने के बाद ही बाहर निकलें। घर में अगरबत्ती, धूपबत्ती या मच्छर मारने वाली कॉइल न जलाएं। ये बंद कमरे में इंडोर पॉल्यूशन का बड़ा कारण बनते हैं। रोजाना शाम को गुनगुने पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर गरारे करें और सादे पानी की भाप (steam) लें। इससे गले की सूजन और जमा बलगम ढीला होता है।
बच्चों की श्वसन नली संकरी होती है और बुजुर्गों की फेफड़ों की कार्यक्षमता उम्र के साथ कम हो जाती है। इसलिए इन दोनों समूहों को विशेष सुरक्षा की जरूरत है;
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, ज्यादातर खांसी 2 से 3 हफ्तों में ठीक हो जाती है। लेकिन अगर खांसी में नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए अस्पताल या विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें;