स्वास्थ्य

Allergy vs Cold: प्रदूषण और बदलते मौसम में खांसी क्यों बढ़ती है? क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें एलर्जी के लक्षण और कब डॉक्टर के पास जाएं

Allergy vs Cold: प्रदूषण और बदलते मौसम में क्यों बढ़ रही है खांसी? नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन, साइंस डायरेक्ट और क्लीवलैंड क्लिनिक से जानें एलर्जी और वायरल में फर्क और डॉक्टर के पास जाने के सही संकेत।
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Updated: 8 Nov 2026, 8:00 AM IST
प्रदूषण और बदलते मौसम में मास्क पहनकर खांसता हुआ व्यक्ति, एयर पॉल्यूशन और कफ की समस्या को दर्शाता हुआ चित्र
बदलती हवा और बढ़ता प्रदूषण श्वसन तंत्र को सीधे प्रभावित करता है, जिससे गले में खराश और लगातार खांसी की समस्या आम हो जाती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Allergy vs Cold: गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही हवा में घुलती धुंध (स्मॉग) और गिरता तापमान अपने साथ सेहत की ढेरों चुनौतियां लेकर आता है। इन दिनों अस्पताल की ओपीडी (OPD) से लेकर घर-घर तक एक ही आवाज सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है धंसका और लगातार उठती खांसी। कोई इसे आम सर्दी-जुकाम मानकर घरेलू नुस्खे आजमा रहा है, तो कोई इसे लगातार सीने में दबाए घूम रहा है। लेकिन एक क्लिनिकल इमरजेंसी नर्सिंग एक्सपर्ट के तौर पर मेरा अनुभव कहता है कि बदलते मौसम और वायु प्रदूषण के इस कॉम्बिनेशन में खांसी को मामूली समझना भारी पड़ सकता है। प्रदूषण में मौजूद हानिकारक कण और तापमान का अचानक गिरना हमारे श्वसन तंत्र को सीधे निशाना बनाते हैं। आइए समझते हैं कि आखिर इस मौसम में फेफड़े क्यों चिल्लाते हैं और एलर्जी, वायरल संक्रमण व खतरे के संकेतों की पहचान कैसे करें।

प्रदूषण और बदलते मौसम में खांसी क्यों बढ़ती है? जानें कारण

मौसम बदलने और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बिगड़ने पर हवा में सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10), धूल, परागकण (pollen) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों की मात्रा काफी बढ़ जाती है। जब हम इस प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, तो ये कण हमारे श्वसन मार्ग (Airways) की अंदरूनी परत में जलन और सूजन पैदा कर देते हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, हवा के प्रदूषक तत्व और सिगरेट/पराली का धुआं हमारी वायु नलिकाओं के नर्वस सिस्टम (न्यूरॉन्स) को अत्यधिक संवेदनशील बना देते हैं। इससे छोटी सी उत्तेजना पर भी गले में तेज धंसका उठने लगता है। ठंडी और शुष्क (dry) हवा श्वसन मार्ग की प्राकृतिक नमी को सुखा देती है। इससे गले में खराश बढ़ती है और शरीर बलगम (mucus) बनाकर इसे साफ करने की कोशिश करता है, जिससे खांसी का दौरा बार-बार आता है।

सामान्य सर्दी और एलर्जी की खांसी में क्या फर्क है? पहचानें लक्षण

अक्सर लोग वायरल इनफेक्शन और एलर्जी की खांसी के बीच अंतर नहीं समझ पाते, जिससे इलाज में देरी होती है। इनकी पहचान इन अंतरों से की जा सकती है;

Allergy vs Cold

प्रदूषण और बदलते मौसम में घर पर किन जरूरी बातों का ध्यान रखें?

सांस संबंधी परेशानियों से बचने के लिए दैनिक दिनचर्या में ये व्यावहारिक बदलाव करें;

साइंस डायरेक्ट के अनुसार, जब भी बाहर निकलें, साधारण कपड़े के मास्क की जगह N95 या FFP2 मास्क का इस्तेमाल करें। यह महीन प्रदूषक कणों को फेफड़ों तक जाने से रोकता है। जब AQI बहुत खराब हो, तो तड़के (Early morning) वॉक पर जाने से बचें। इस समय स्मॉग जमीन के करीब रहता है। धूप निकलने के बाद ही बाहर निकलें। घर में अगरबत्ती, धूपबत्ती या मच्छर मारने वाली कॉइल न जलाएं। ये बंद कमरे में इंडोर पॉल्यूशन का बड़ा कारण बनते हैं। रोजाना शाम को गुनगुने पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर गरारे करें और सादे पानी की भाप (steam) लें। इससे गले की सूजन और जमा बलगम ढीला होता है।

खांसी और गले की परेशानी में क्या खाएं-पिएं?

  • ठंडा पानी पीने से बचें।
  • एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर आहार।
  • ज्यादा ठंडी चीजें, आइसक्रीम, तली-भुनी वस्तुएं, और अत्यधिक खट्टे या डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि ये गले में जलन पैदा कर सकते हैं।

बच्चों और बुजुर्गों को खांसी से बचाने के लिए क्या सावधानियां बरतें?

बच्चों की श्वसन नली संकरी होती है और बुजुर्गों की फेफड़ों की कार्यक्षमता उम्र के साथ कम हो जाती है। इसलिए इन दोनों समूहों को विशेष सुरक्षा की जरूरत है;

  • बच्चों के लिए- छोटे बच्चों को बार-बार बिना डॉक्टरी सलाह के कफ सिरप (Cough Syrup) न दें। उन्हें ठंडी हवा के संपर्क में आने से बचाएं, सिर और छाती को सूती व ऊनी कपड़ों से ढककर रखें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
  • बुजुर्गों के लिए- यदि बुजुर्गों को पहले से अस्थमा, सीओपीडी (COPD) या दिल की बीमारी है, तो वे अपनी रूटीन दवाएं और इनहेलर समय पर लें। निमोनिया और फ्लू का फ्लू-शॉट (वैक्सीनेशन) डॉक्टर से सलाह लेकर जरूर लगवाएं।

लगातार खांसी होने पर कब डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, ज्यादातर खांसी 2 से 3 हफ्तों में ठीक हो जाती है। लेकिन अगर खांसी में नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए अस्पताल या विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें;

  • सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज (Wheezing) आना या सांस फूलना।
  • खांसी के साथ लाल खून आना या अत्यधिक गाढ़ा पीला/हरा बलगम निकलना।
  • सांस खींचने या खांसने पर छाती में तेज दर्द होना।
  • 3-4 दिनों से ज्यादा समय तक 100°F से अधिक बुखार बना रहना।
  • हफ्तों तक खांसी के साथ अचानक वजन कम होना।
  • अगर खांसी 3 से 4 हफ्ते बीत जाने के बाद भी ठीक नहीं हो रही है, तो यह क्रोनिक स्थिति का संकेत है।
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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