
Rabies From Bats Death News : चमगादड़ एक बच्चे के चेहरे पर बैठा और उसके बाद मौत हो गई। बीबीसी (BBC) की एक रिपोर्ट में बताया गया है, कनाडा में एक 11 साल के बच्चे के सोते समय उसके चेहरे पर एक चमगादड़ आकर बैठ गया था। इसके बाद रेबीज के कारण मौत हो गई। इस मामूली से संपर्क को परिवार ने आम बात समझा, लेकिन यही लापरवाही जानलेवा साबित हुई।
अक्सर हम सोचते हैं कि जब तक कोई जानवर बुरी तरह काटे या नोचे नहीं, तब तक रेबीज का खतरा नहीं होता। लेकिन अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था CDC (Centers for Disease Control and Prevention) की गाइडलाइंस कहती हैं कि ऐसी स्थिति में तुरंत Post-Exposure Prophylaxis (PEP) यानी रेबीज का इलाज शुरू करना जिंदगी बचा सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, चमगादड़ का काटना अपने आप में खतरनाक नहीं होता, लेकिन काटने से रेबीज का खतरा हो सकता है। क्योंकि, चमगादड़ के दांत इतने छोटे और नुकीले होते हैं कि अगर वो सोते में किसी इंसान को काट भी ले, तो कई बार पता ही नहीं चलता। उनकी लार (Saliva) में रेबीज का वायरस होता है। अगर चमगादड़ सिर्फ त्वचा को छूकर निकल जाए या हल्का सा खरोंच भी दे, तो भी उसका वायरस शरीर के अंदर पहुंच सकता है। बच्चे के मामले में भी यही हुआ एक मामूली सा संपर्क जानलेवा साबित हो गया।
Post-Exposure Prophylaxis (PEP) रेबीज से बचने के लिए दिए जाने वाले टीकों (Vaccines) और दवाओं का एक कोर्स है। सीडीसी के मुताबिक, रेबीज एक ऐसा वायरस है जो शरीर में जाने के बाद सीधा हमारे दिमाग और नसों पर हमला करता है। रेबीज का इलाज सिर्फ लक्षण दिखने से पहले ही मुमकिन है। इसलिए PEP को तुरंत शुरू करना बेहद जरूरी होता है ताकि वायरस दिमाग तक पहुंच ही न पाए।
अगर कोई चमगादड़ आपके कमरे में आ गया है, या सोते समय शरीर के किसी हिस्से से छू गया है, तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें। चमगादड़ के काटने का निशान इतना छोटा होता है कि वो आंखों से दिखाई भी नहीं देता। अगर कोई बच्चा, बुजुर्ग या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति उस कमरे में सोया था जहां चमगादड़ पाया गया, तो CDC मानती है कि उन्हें तुरंत PEP (इलाज) की जरूरत हो सकती है, भले ही उन्होंने काटने की बात न कही हो।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।