Real Buttermilk vs Watered Curd: आपने गौर किया हो तो आजकल हम जो घरों में छाछ बनाते हैं, उसमें पारम्परिक छाछ का कोई अंश ही नहीं होता है। यह मात्र पतला किया हुआ दही होता है। आइए जानते हैं कि यह पारम्परिक छाछ से किस प्रकार अलग है, और ये फायदेमंद कब साबित होता है।
Real Buttermilk vs Watered Curd: भारतीय रसोई में छाछ एक लोकप्रिय और फायदेमंद पेय है। लेकिन यह तभी फायदेमंद है जब इसे सही तरीके से बनाया जाए। इसे बनाने के तरीके को लेकर ज्यादातर लोगों में गलतफहमी रहती है। अधिकतर लोग दही में पानी मिलाकर इसे छाछ बना लेते हैं, जबकि वास्तव में छाछ तो एक अलग उत्पाद है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व रहते हैं।
आइए जानते हैं कि मक्खन निकालने के बाद बनी छाछ और पतला किए गए दही से बनी छाछ में क्या अंतर है। डेयरी पेय पर पीएमसी (PMC) में एक विशेषज्ञों द्वारा परखे गए अध्ययन में बताया गया है कि पारंपरिक छाछ जैसे कल्चर किए गए दूध उत्पादों में सक्रिय प्रोबायोटिक बैक्टीरिया होते हैं जो पाचन में सहायता करते हैं।
इतिहास में गर्मियों में छाछ बहुत जरूरी मानी जाती थी क्योंकि यह शरीर को ठंडा रखती है और पाचन में भी मदद करती है। इसमें कैल्शियम, बी12, पोटेशियम, और राइबोफ्लेविन तत्व होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। पारंपरिक छाछ, दही को मथकर मक्खन अलग करने के बाद बनती है। जब दही से फैट (वसा) निकल जाता है, तो यह एक हल्का, खट्टा और अच्छे बैक्टीरिया से भरा तरल बन जाता है। यह तरल चिकना तो होता है लेकिन इसमें फैट बहुत कम होता है, और यह पाचन तंत्र को मजबूत करने वाले बैक्टीरिया से भरा होता है। पारंपरिक छाछ दही और दूध से ज्यादा आसानी से पच जाती है, क्योंकि यह हल्की होती है।
जब दही को बिना मथे ही सीधा उसमें पानी मिलाया जाता है तो दही का फैट उसमें ही बना रहता है। पानी मिलाने के कारण यह सिर्फ पतला हो जाता है, इसकी बनावट वैसी की वैसी बनी रहती है। यह सिर्फ पीने में ही अच्छी लगती है लेकिन इसमें कम फैट, प्रोबायोटिक की ताकत वाले बदलाव जो पारम्परिक छाछ में होते हैं, वे अनुपस्थित होते हैं। न तो यह छाछ खट्टी होती है और न ही इसमें पाचन शक्ति को बढ़ाने वाले बैक्टीरिया होते हैं।
यह असली छाछ नहीं है, लेकिन यह भी एक अच्छा पेय हो सकता है जो वसा वाले दही की तुलना में हल्का होता है। जो लोग दही के गाढ़ेपन के बिना एक हल्का विकल्प चाहते हैं, उनके लिए पतला दही एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह बच्चों या बुजुर्गों के लिए भी एक उपयोगी पेय है जो हल्के बनावट को पसंद करते हैं। इसे गर्मियों में ठंडा परोसा जा सकता है और यह एक सरल सुखदायक विकल्प प्रदान करता है जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।