Reproductive Crisis: आज हमारी दुनिया में इतने ज्यादा बनावटी केमिकल भर गए हैं कि वैज्ञानिकों को डर लगने लगा है। ये जहरीले केमिकल और बदलता मौसम मिलकर एक ऐसा साइलेंट संकट ला रहे हैं, जिससे न केवल इंसान बल्कि जानवर और परिंदे भी बच्चे पैदा करने की ताकत खो सकते हैं।
Reproductive Crisis: हम जिस हवा में सांस ले रहे हैं और जो चीजें इस्तेमाल कर रहे हैं, उनमें हजारों ऐसे केमिकल घुसे हुए हैं जिनके बारे में हमें पता तक नहीं है। शोध करने वाली एक टीम ने कहा है कि प्लास्टिक, कीटनाशक और ये गंदे प्रदूषक हमारी फर्टिलिटी (बच्चे पैदा करने की क्षमता) को कम कर रहे हैं। ये समस्या सिर्फ हमारे साथ नहीं है, समुद्र की मछलियों से लेकर आसमान में उड़ने वाले पक्षियों तक, हर कोई इस छिपे हुए खतरे की चपेट में है।
ओरेगन विश्वविद्यालय की इकोटॉक्सिकोलॉजिस्ट सुजैन ब्रैंडर ने लिखा है ,पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं, बढ़ते तापमान, हाइपोक्सिया और रासायनिक जोखिम मिलकर प्रजनन संबंधी तनाव को और बढ़ा देते हैं।
पिछले सिर्फ 50 सालों में धरती से दो-तिहाई जंगली जानवर और जीव-जंतु खत्म हो चुके हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है प्रदूषण और मौसम का बिगड़ता मिजाज। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, ये केमिकल और भी जहरीले होते जा रहे हैं, जिससे जानवरों की नई नस्लें पैदा होने में बड़ी दिक्कत आ रही है।
आज मार्केट में 1,000 से ज्यादा ऐसे बनावटी केमिकल मौजूद हैं जो हमारे शरीर के नेचुरल हार्मोन्स की नकल करते हैं या उन्हें काम करने से रोक देते हैं। ताज्जुब की बात तो ये है कि इनमें से केवल 1% रसायनों की ही ठीक से जांच हुई है कि वे हमारे लिए सेफ हैं या नहीं।
पूरी दुनिया में बांझपन (Infertility) की दर बहुत तेजी से बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि खेतों में छिड़के जाने वाले कीटनाशकों के कारण पुरुषों में स्पर्म काउंट (शुक्राणुओं) की कमी हो रही है। हम अनजाने में उन चीजों के संपर्क में आ रहे हैं जो हमें अंदर से खोखला कर रही हैं।
डॉक्टर शैलजा अग्रवाल (स्त्री रोग विशेषज्ञ) के अनुसार, केवल इस कारण से ही फर्टिलिटी कम हो रही है ये कहना पूरी तरह सही नहीं है। लेकिन कुछ हद तक हार्मोन्स और स्पर्म काउंट कम होने में योगदान है, इसलिए जितना संभव हो प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल कम करें और ताजा व जैविक खान-पान को प्राथमिकता दें । प्रदूषण के प्रति जागरूकता और केमिकल्स के सीमित संपर्क से ही हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रख सकते हैं ।
इतिहास गवाह है कि इन केमिकल्स ने पहले भी तबाही मचाई है। डीडीटी जैसे कीटनाशकों ने पक्षियों के अंडों के छिलके इतने पतले कर दिए थे कि वे फूटने लगे और उनकी आबादी गिरने लगी। आज 1,40,000 से भी ज्यादा ऐसे केमिकल दुनिया में फैले हुए हैं, और इनमें से एक भी जहरीला केमिकल पूरी प्रजाति को मिटाने के लिए काफी है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।