स्वास्थ्य

Respiratory Infections: दुनिया में हर दिन 1,800 बच्चों की सांस संबंधी संक्रमण से मौत, जानिए निमोनिया के शुरुआती लक्षण और बचाव

Child Respiratory Diseases: दुनिया में हर दिन 5 साल से कम उम्र के 1,800 से ज्यादा बच्चों की मौत रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन्स के कारण हो रही है। जानिए निमोनिया के शुरुआती लक्षण, जोखिम और बचाव के उपाय।
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Updated: 30 May 2026, 12:25 PM IST
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श्वसन संक्रमण के प्रभाव को दर्शाती मेडिकल ग्राफिक इमेज (Photo- Chatgtp)

Respiratory Infections in Children: बच्चों के स्वास्थ्य प्रबंधन में आमतौर पर पोषण और टीकाकरण पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन सांस से जुड़े संक्रमण इस वक्त वैश्विक स्तर पर बाल मृत्यु दर का एक बड़ा कारण बने हुए हैं। वैश्विक डेटाबेस अवर वर्ल्ड इन डेटा (Our World in Data) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में हर दिन 5 साल से कम उम्र के 1,800 से ज्यादा बच्चों की मौत सिर्फ रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन्स (श्वसन प्रणाली के संक्रमण) के कारण हो रही है।

यह डेटा सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक गंभीर संकेत है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 5 साल से कम उम्र के बच्चों में होने वाली कुल मौतों में से लगभग आधी मौतों के पीछे संक्रामक बीमारियां हैं, जिनमें सबसे प्रमुख कारण निमोनिया और इन्फ्लूएंजा जैसे सांस के संक्रमण हैं।

बच्चों की मृत्यु के मुख्य कारण

वैश्विक स्वास्थ्य आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु के पीछे ये मुख्य क्लिनिकल कारण रहे हैं:

  • रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन्स (Respiratory infections): यह बाल मृत्यु दर का सबसे बड़ा कारण है, जो कुल मामलों का अकेले 14% है।
  • समय से पहले जन्म (Preterm birth): दूसरा सबसे बड़ा कारण, जो 13% शिशुओं की मृत्यु की वजह बनता है।
  • नवजात का दम घुटना (Neonatal asphyxia): जन्म के तुरंत बाद ऑक्सीजन की कमी या बर्थ ट्रॉमा के कारण 12% मामले दर्ज होते हैं।
  • मलेरिया (Malaria): मच्छरों से फैलने वाला यह संक्रमण 8.8% मामलों के लिए जिम्मेदार है।
  • डायरिया (Diarrhoeal diseases): दूषित पानी और स्वच्छता की कमी के कारण होने वाला डायरिया 6.8% बच्चों को प्रभावित करता है।

बच्चों के फेफड़ों पर क्यों भारी पड़ता है यह संक्रमण?

चिकित्सा विज्ञान और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) के बाल रोग अध्ययनों के अनुसार, बच्चों में इस संक्रमण के गंभीर होने के पीछे तीन मुख्य कारण हैं।

  • अविकसित श्वसन तंत्र: नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों की सांस की नली बेहद संकीर्ण और नाजुक होती है। हवा में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस के संपर्क में आते ही वायुमार्ग में सूजन आ जाती है और बलगम जमा होने से सांस लेने में रुकावट पैदा होती है।
  • घरेलू वायु प्रदूषण (Indoor Air Pollution): बाहरी प्रदूषण के अलावा, घर के भीतर का धुआं (जैसे वेंटिलेशन की कमी, चूल्हे या तंबाकू का धुआं) सीधे तौर पर बच्चों के फेफड़ों की कार्यक्षमता को कमजोर कर देता है।
  • प्रतिरोधक क्षमता और पोषण की कमी: जिन बच्चों को समय पर न्यूमोकोकल (PCV) वैक्सीन नहीं मिलती या जो गंभीर कुपोषण का शिकार हैं, उनका शरीर इस सामान्य संक्रमण का प्रतिरोध नहीं कर पाता।

इन 3 लक्षणों की समय पर पहचान है जरूरी

बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) के अनुसार, यदि शुरुआती स्तर पर ही इन तीन क्लिनिकल लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो मृत्यु दर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है:

  • चेस्ट इनड्रॉइंग (पसलियों का चलना): सांस लेते समय यदि बच्चे के सीने या पसलियों के नीचे का हिस्सा असामान्य रूप से अंदर की तरफ धंसता है, तो यह तीव्र निमोनिया का प्राथमिक लक्षण है।
  • टैकीपनिया (सांस की तेज रफ्तार): यदि बच्चा सामान्य गति से बहुत तेजी से सांस ले रहा हो या सांस लेते समय घरघराहट (Wheezing) की आवाज आ रही हो।
  • फीडिंग छोड़ना और सुस्ती: यदि बच्चा अचानक पूरी तरह सक्रिय होना बंद कर दे, अत्यधिक सुस्त हो जाए और मां का दूध या तरल पदार्थ पीना छोड़ दे।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
30 May 2026, 12:25 PM IST
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