
Ebola Vaccine News:डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और उसके पड़ोसी देश युगांडा में इबोला वायरस का एक नया आउटब्रेक तेजी से फैल रहा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, इस बार मामले बेहद तेजी से बढ़ रहे हैं और ब्लूमबर्ग में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 1000 से ज्यादा सस्पेक्टेड केस और लगभग 220 से अधिक मौतें हो चुकी है। भारत में भी बेंगलुरु के बाद अहमदाबाद में एक और संदिग्ध मरीज का पता चला है। इस हालात के बीच, रूस से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। वहां के वैज्ञानिकों ने इस नए इबोला स्ट्रेन से लड़ने के लिए एक नई वैक्सीन तैयार कर ली है।
इबोला वायरस के कई स्ट्रेन होते हैं, जिनमें जायरे (Zaire) स्ट्रेन सबसे आम और जानलेवा रहा है। मार्केट में पहले से मौजूद इबोला वैक्सीन (जैसे एरवेबो) मुख्य रूप से जायरे स्ट्रेन के खिलाफ काम करती हैं। बुंदीबुग्यो एक दुर्लभ और अलग स्ट्रेन है, जिसके लिए अब तक कोई भी स्वीकृत (Approved) वैक्सीन या सटीक इलाज मौजूद नहीं था। रूस की यह नई वैक्सीन पहली बार विशेष रूप से बुंदीबुग्यो स्ट्रेन को टारगेट करने और उससे सुरक्षा देने के लिए बनाई गई है, जो मौजूदा आउटब्रेक को रोकने में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
हालांकि रूस ने इसके विस्तृत क्लिनिकल डेटा को पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन रूसी मेडिकल साइंस के इतिहास को देखते हुए यह माना जा रहा है कि यह एक वायरल वेक्टर वैक्सीन (Viral Vector Vaccine) हो सकती है। इसमें एक सुरक्षित, गैर-नुकसानदेह वायरस (जैसे एडेनोवायरस) का उपयोग करके इबोला वायरस के जेनेटिक मटेरियल (ग्लाइकोप्रोटीन) को शरीर में पहुंचाया जाता है। इसके बाद इंसानी शरीर का इम्यून सिस्टम असली इबोला वायरस को पहचानना सीख जाता है और एंटीबॉडीज तैयार करता है।
कांगो और पड़ोसी देश युगांडा में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं, जिसके कारण इस वैक्सीन का समय पर आना बेहद जरूरी है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडहानोम गेब्रेयेसस के अनुसार, जमीन पर वास्तविक आंकड़े दर्ज मामलों से कहीं बड़े हैं। इबोला वायरस संक्रमित जानवरों (जैसे फ्रूट बैट्स) से इंसानों में और फिर इंसानों के बॉडी फ्लूइड्स (खून, पसीना, लार) के जरिए तेजी से फैलता है। बुंदीबुग्यो स्ट्रेन को जायरे के मुकाबले थोड़ा कम घातक माना जाता है, लेकिन इबोला का औसत मृत्यु दर 50% है (जो पिछले इतिहास में 25% से 90% तक रहा है)। बिना वैक्सीन के इसे रोकना नामुमकिन है।
वैक्सीन का विकास एक बड़ी सफलता है, लेकिन इसे महामारी के केंद्र तक पहुंचाने में कई चुनौतियां हैं। इबोला प्रभावित अफ्रीकी इलाके बेहद दूर-दराज और पिछड़े हैं। इस वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए बेहद कम तापमान (Sub-zero temperatures) की आवश्यकता हो सकती है, जिसके लिए मजबूत कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए। डब्लूएचओ (WHO) और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर इस वैक्सीन का बड़े पैमाने पर वितरण सुनिश्चित करना होगा, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में फ्रंटलाइन पर काम कर रहे हेल्थकेयर वर्कर्स और आम लोगों को यह तुरंत दी जा सके।
बुंदीबुग्यो इबोला आउटब्रेक के बीच अब भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस महीने की शुरुआत में अफ्रीका से भारत आए एक 36 वर्षीय व्यक्ति को मंगलवार रात अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के विशेष इबोला आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया है। मरीज में वायरल हेमोरेजिक बुखार (Viral Hemorrhagic Fever) जैसे गंभीर लक्षण देखे गए हैं, जो इबोला संक्रमण की ओर इशारा करते हैं। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग तुरंत हरकत में आया और मरीज के खून के नमूनों को अंतिम पुष्टि के लिए पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (ICMR-NIV) भेज दिया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारत में इबोला ने दस्तक दी है या नहीं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।