
Tachypnea Symptoms: भागदौड़ करने, सीढ़ियां चढ़ने या भारी कसरत के बाद सांस का तेज होना एकदम सामान्य बात है। कुछ देर आराम करने पर सांस की रफ्तार अपने आप सामान्य हो जाती है। लेकिन सोचिए, अगर आप शांति से सोफे पर बैठे हैं या लेटे हुए हैं और फिर भी आपकी सांसें बहुत तेजी से और उथली (Shallow) चलने लगें, तो यह चिंता की बात बन जाती है। सामान्य से बहुत अधिक तेज सांस लेने की इस स्थिति को टैकीपनिया (Tachypnea) कहा जाता है। टैकीपनिया अपने आप में कोई अकेली बीमारी नहीं है, बल्कि यह इस बात का सीधा इशारा है कि आपके फेफड़ों, दिल या खून में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बिगड़ चुका है। आइए जानते हैं कि इसके कारण और लक्षण क्या हैं?
यूरोप पीएमसी के अनुसार, एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति जब आराम की स्थिति में होता है, तो वह एक मिनट में आमतौर पर 12 से 20 बार सांस लेता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति बिना किसी शारीरिक मेहनत के आराम करते हुए भी प्रति मिनट 20 से अधिक बार सांस लेने लगे, तो इसे टैकीपनिया की श्रेणी में रखा जाता है। इसमें सांसें न सिर्फ तेज चलती हैं, बल्कि वे काफी उथली यानी छोटी होती हैं। इसका मतलब यह है कि मरीज पूरी गहराई से हवा अंदर नहीं खींच पाता, बल्कि जल्दी-जल्दी सिर्फ ऊपरी स्तर पर ही सांस लेता और छोड़ता है। नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में सांस लेने की सामान्य दर बड़ों से ज्यादा होती है, लेकिन अगर वे भी अपनी उम्र के तय दायरे से ज्यादा तेज सांस ले रहे हों, तो उसे बाल चिकित्सा में टैकीपनिया माना जाता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब शरीर के अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलती या खून में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगती है, तो दिमाग फेफड़ों को जल्दी-जल्दी सांस लेने का आदेश देता है। इसके पीछे कई स्वास्थ्य समस्याएं जिम्मेदार हो सकती हैं;
अगर सिर्फ सांस तेज चल रही है, तब भी डॉक्टर को दिखाना जरूरी है। लेकिन अगर टैकीपनिया के साथ नीचे दिए गए लक्षण भी दिखाई दें, तो यह मेडिकल इमरजेंसी का संकेत है;
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर सबसे पहले पल्स ऑक्सीमीटर से खून में ऑक्सीजन का स्तर नापते हैं और स्टेथोस्कोप से फेफड़ों की आवाज सुनते हैं। इसके बाद कारण का पता लगाने के लिए चेस्ट एक्स-रे, सीटी स्कैन, ईसीजी (ECG) और आर्टेरियल ब्लड गैस (ABG) टेस्ट किया जाता है। यदि शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर गया है, तो तुरंत मास्क या कैनुला के जरिए मरीज को ऑक्सीजन दी जाती है। अगर समस्या अस्थमा या सीओपीडी के कारण है, तो श्वास नली को खोलने वाली दवाएं दी जाती हैं। निमोनिया या संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक्स दी जाती हैं, जबकि दिल के मरीजों को अतिरिक्त पानी निकालने वाली दवाएं (ड्यूरेटिक्स) दी जाती हैं। यदि कारण पैनिक अटैक है, तो मरीज को शांत करने की ब्रीदिंग तकनीक और दवाएं दी जाती हैं।