
Tendinitis Symptoms: कभी ऐसा हुआ है कि आपने बाल्टी उठाई और कंधे में तेज कसक उठी? या सीढ़ी चढ़ते-उतरते घुटने में खिंचाव महसूस हुआ? अक्सर हम ऐसे दर्द को अरे यार, थोड़ा थक गए होंगे या आजकल उम्र का असर है कहकर टाल देते हैं। लेकिन अगर यह दर्द किसी खास अंग को हिलाने पर बार-बार उठ रहा है, तो यह सिर्फ आम थकावट नहीं है। डॉक्टरी भाषा में इसे टेंडिनाइटिस (Tendinitis) कहते हैं। मेयो क्लिनिक के मुताबिक, टेंडिनाइटिस (Tendinitis) का सीधा सा मतलब है हड्डियों और मांसपेशियों को जोड़ने वाली नस में आने वाली सूजन है। अधिकांश मामलों में टेंडिनाइटिस का इलाज आराम, फिजियोथेरेपी और दर्द कम करने वाली दवाइयों से किया जा सकता है। आइए जानते हैं कि यह क्या है, क्यों होता है और इसके लक्षण क्या होते हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, हमारे शरीर में हड्डियां और मांसपेशियां (Muscles) आपस में एक बहुत मजबूत, डोरी (टेंडन) से जुड़ी होती हैं। जब आप हाथ या पैर हिलाते हैं, तो यह खिंचती है और हड्डी को हिलाती है। अब सोचिए, अगर किसी रबर को आप बार-बार, दिन-रात एक ही तरह से खींचते रहेंगे, तो क्या होगा? उसमें बारीक-बारीक कट आ जाएंगे या वह सूज जाएगी। बस! यही जब हमारे शरीर की उस टेंडन के साथ होता है, तो उसमें सूजन आ जाती है और दर्द शुरू हो जाता है। इसी को टेंडिनाइटिस कहते हैं।
अगर आपको नीचे दी गई बातें महसूस हो रही हैं, तो समझ जाइए कि टेंडन में सूजन आ चुकी है;
अगर दर्द अभी-अभी शुरू हुआ है, तो क्लीवलैंड क्लिनिक एक बहुत ही आसान तरीका बताता है R.I.C.E. फॉर्मूला;
1. Rest (आराम दें)- सबसे पहले उस अंग से वो काम करना तुरंत बंद कर दें जिससे दर्द बढ़ रहा है। जोड़ को आराम दें।
2. Ice (बर्फ की सिकाई)- दर्द और सूजन वाली जगह पर दिन में 3-4 बार बर्फ से 15-20 मिनट सिकाई करें। बर्फ को सीधे चमड़ी पर न लगाएं, कपड़े में लपेटकर सिकाई करें।
3. Compression (हल्की पट्टी)- उस हिस्से पर थोड़ी सूती पट्टी या इलास्टिक ग्रिप बांध लें ताकि सूजन न फैले (ध्यान रहे, बहुत कसकर नहीं बांधना है)।
4. Elevation (ऊंचा रखें)- अगर पैर या कलाई में दर्द है, तो बैठते या सोते समय उसे तकिए के ऊपर रखकर थोड़ा ऊंचा रखें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।