
Varicose Veins VS Deep Vein Thrombosis Hindi: अक्सर हम देखते हैं कि लंबे समय तक खड़े रहने या काम करने के बाद पैरों की नसें नीली, बैंगनी या उभरी हुई दिखने लगती हैं। कई बार पैरों में सूजन और भारीपन भी आ जाता है। ज्यादातर लोग इसे थकान या बुढ़ापे का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हेल्थलाइन (Healthline) की रिपोर्ट के मुताबिक, पैरों की नसों से जुड़ी दो अलग-अलग समस्याएं होती हैं वैरिकोज वेन्स (Varicose Veins) और डीवीटी (Deep Vein Thrombosis - DVT)। ऊपर से देखने में ये दोनों एक जैसी लग सकती हैं, लेकिन इनमें से एक आम समस्या है और दूसरी जानलेवा भी साबित हो सकती है। आइए समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, जब पैरों की नसें सूजकर बाहर की तरफ उभर आती हैं और नीली या बैंगनी दिखने लगती हैं, तो उसे वैरिकोज वेन्स कहते हैं। हमारी नसों में छोटे-छोटे वाल्व (Valves) होते हैं, जो खून को नीचे से ऊपर दिल की तरफ भेजते हैं। जब ये वाल्व कमजोर हो जाते हैं, तो खून नीचे पैरों में ही जमा होने लगता है। पैरों में भारीपन, दर्द, खुजली, नसों का गुच्छा बनना और शाम तक पैरों में हल्की सूजन आना वैरिकोज वेन्स के मुख्य लक्षण है। यह समस्या आमतौर पर ज्यादा खतरनाक या जानलेवा नहीं होती, हालांकि इससे दर्द और असहजता बनी रहती है।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, डीवीटी वैरिकोज वेन्स से बिल्कुल अलग और काफी गंभीर बीमारी है। इसमें त्वचा के ऊपर नहीं, बल्कि पैरों के अंदर की गहरी नसों (Deep Veins) में खून का थक्का (Blood Clot) जम जाता है। अगर पैर की अंदरूनी नस में जमा हुआ खून का थक्का वहां से निकलकर फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो इसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म (Pulmonary Embolism) कहते हैं। यह स्थिति सांस रोकने और अचानक जान लेने जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। आमतौर पर यह सिर्फ एक ही पैर में होता है। पैर में अचानक तेज सूजन आना, छूने पर पैर का बहुत गर्म लगना, त्वचा का लाल या पीला पड़ जाना और चलने में तेज दर्द होना इसके लक्षण है। यह एक मेडिकल इमरजेंसी (आपातकालीन स्थिति) है। इसमें तुरंत डॉक्टर की मदद की जरूरत होती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।