स्वास्थ्य

Tracheostomy: जब सांस लेने में हो दिक्कत, गले में बनाई जाती है नई सांस की राह, जानिए क्या है ट्रैकियोस्टॉमी

Tracheostomy Hindi: ट्रैकियोस्टॉमी (Tracheostomy) क्या होती है और कब की जाती है क्या आपको पता है? क्लीवलैंड क्लिनिक और मेयो क्लिनिक से जानिए गले में सांस की नई राह क्यों बनाई जाती है और इसके बाद कैसे रखें मरीज का ध्यान।
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Sep 08, 2026
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ट्रैकियोस्टॉमी (Tracheostomy) क्या होती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Tracheostomy Procedure: सोचिए अगर किसी इंसान को अचानक सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत होने लगे या हवा फेफड़ों तक पहुंचना ही बंद हो जाए, तो यह कितनी डरावनी स्थिति हो सकती है। ऐसी हालत में डॉक्टर सबसे पहले मरीज को सांस दिलाने की कोशिश करते हैं। आमतौर पर मुंह या नाक के जरिए फेफड़ों तक एक पतली नली डाली जाती है। लेकिन जब मरीज खुद से सांस लेने में पूरी तरह असमर्थ हो या गले का रास्ता बंद हो चुका हो, तब डॉक्टरों को एक अलग तरीका अपनाना पड़ता है। इसी तरीके को डॉक्टरी भाषा में ट्रैकियोस्टॉमी (Tracheostomy) कहते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, यह एक ऐसा छोटा सा ऑपरेशन है जिसमें डॉक्टर गले के सामने वाले हिस्से में एक छोटा सा छेद करके सांस की नली में सीधे एक ट्यूब लगा देते हैं, ताकि मरीज आसानी से सांस ले सके। आइए समझते हैं कि यह क्या है, इसे कब किया जाता है और इसके बाद मरीज का ध्यान कैसे रखा जाता है।

क्या है ट्रैकियोस्टॉमी?

मेयो क्लिनिक के अनुसार, जब मुंह या नाक से सांस अंदर जाने का रास्ता किसी वजह से रुका या बंद हो जाता है, तो डॉक्टर गले में बाहर की तरफ से एक नया सांस लेने का दरवाजा बना देते हैं। गले में किए गए इस छोटे से छेद के अंदर प्लास्टिक या धातु की एक पतली नली (ट्यूब) बिठा दी जाती है। इसके बाद मरीज को नाक या मुंह के बजाय सीधे इसी नली से सांस आने-जाने लगती है।

आखिर डॉक्टरों को कब करनी पड़ती है यह प्रक्रिया?

  • लंबे समय से वेंटिलेटर पर होना।
  • सांस की नली में रुकावट आना।
  • गंभीर चोट लगना।
  • गले की मांसपेशियां काम न करना।

कैसे किया जाता है यह काम?

  • मरीज को बिल्कुल दर्द न हो, इसके लिए सबसे पहले उसे सुन्न या बेहोश किया जाता है।
  • इसके बाद गले के निचले हिस्से में एक बहुत छोटा सा छेद किया जाता है।
  • यह छेद सीधे सांस की नली (Windpipe) तक पहुंचता है।
  • इसके अंदर सांस की नली (Tracheostomy Tube) बिठाकर गले के चारों तरफ एक मुलायम पट्टी से बांध दिया जाता है ताकि वह अपनी जगह से हिले नहीं।

क्या इस नली के साथ मरीज बोल और खा सकता है?

शुरुआत में जब यह नली लगी होती है, तो हवा गले की आवाज वाली जगह तक नहीं पहुंच पाती, इसलिए मरीज बोल नहीं पाता। लेकिन जब मरीज थोड़ा ठीक होने लगता है, तो एक खास वाल्व लगाकर वह धीरे-धीरे बोलना शुरू कर सकता है। शुरुआत में मरीज को ड्रिप या पेट में लगी नली से खाना-पानी दिया जाता है। जब गले की सूजन कम होती है और मरीज निगलने लायक हो जाता है, तो वह मुंह से भी खा सकता है।

इस नली की देखभाल क्यों है सबसे जरूरी?

गले में बनी इस नई राह में इंफेक्शन होने का खतरा रहता है, इसलिए कुछ बातों का बहुत ध्यान रखना पड़ता है;

  • नली की सफाई करना।
  • हवा में नमी रखना।
  • छेद के पास सफाई रखना।

क्या यह नली हमेशा गले में ही लगी रहती है?

ज्यादातर मामलों में बिल्कुल नहीं! जैसे ही मरीज की मूल बीमारी ठीक हो जाती है, उसके फेफड़े मजबूत हो जाते हैं और वह खुद से सांस लेने लगता है, डॉक्टर इस नली को बाहर निकाल देते हैं। नली निकालने के बाद गले का वह छोटा सा छेद कुछ ही दिनों में अपने आप भरकर बंद हो जाता है। बहुत ही कम मामलों में (जैसे गले का गंभीर कैंसर या स्थाई बीमारी) ही यह नली हमेशा के लिए रखनी पड़ती है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

Updated on:
08 Sept 2026 09:14 am
Published on:
08 Sept 2026 09:13 am