
महिलाओं में ADHD ज्यादा क्यों होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- freepik)
ADHD In Females Hindi: जब भी हम एडीएचडी (ADHD) का नाम सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले किसी ऐसे छोटे बच्चे की तस्वीर आती है जो एक जगह टिककर बैठ नहीं पाता, दिनभर उछल-कूद करता है या उधम मचाता रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह समस्या सिर्फ बच्चों या आदमियों तक ही सीमित नहीं है? लाखों वयस्क महिलाएं भी इस समस्या के साथ जी रही हैं, लेकिन ज्यादातर को तो खुद भी इस बात का पता नहीं होता। अटेंशन डेफिसिट डिसऑर्डर एसोसिएशन (ADDA ) की रिपोर्ट्स बताती हैं कि महिलाओं में ADHD के लक्षण पुरुषों से काफी अलग और छिपे हुए होते हैं। इसी वजह से ज्यादातर महिलाओं में इसकी पहचान या तो बहुत देर से (30-40 साल की उम्र में) होती है, या फिर इसे आम तनाव, घबराहट या डिप्रेशन समझकर छोड़ दिया जाता है। आइए समझते हैं कि महिलाओं में ADHD क्या है, इसके लक्षण अलग क्यों होते हैं और यह पकड़ में क्यों नहीं आता।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, महिलाओं में दिमाग से जुड़ी इस स्थिति के छुपे रहने के पीछे कई बड़ी वजहें हैं;
अगर किसी महिला को ADHD की समस्या है, तो उसकी रोज़मर्रा की जिंदगी में ये बातें बार-बार देखने को मिल सकती हैं;
महिलाओं के शरीर में समय-समय पर होने वाले हार्मोनल बदलाव (जैसे पीरियड्स के दिन, प्रेग्नेंसी या उम्र ढलना) भी ADHD के लक्षणों को बढ़ा या घटा सकते हैं। जब शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल गिरता है, तो दिमाग में ध्यान लगाने वाले केमिकल्स का स्तर भी कम हो जाता है। इसी वजह से पीरियड्स से ठीक पहले या उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं को ध्यान लगाने और काम संभालने में और भी ज़्यादा मुश्किल आने लगती है।
जब तक महिलाओं को अपनी इस समस्या का पता नहीं चलता, तब तक उन्हें यही लगता रहता है कि वे आलसी, लापरवाह या गैर-जिम्मेदार हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बहुत गिर जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि ADHD कोई आलस या नीयत की कमी नहीं है, बल्कि यह दिमाग के काम करने के तरीके से जुड़ी एक स्थिति है। सही समय पर डॉक्टर की सलाह लेने, थेरेपी कराने और अपनी लाइफस्टाइल में थोड़े सुधार करके महिलाएं एक बेहद सफल और खुशहाल जिंदगी जी सकती हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on:
07 Sept 2026 03:30 pm
