
Vaping Side Effects: ई-सिगरेट (E-Cigarette) को कई लोग सामान्य सिगरेट से कम नुकसानदायक मानते हैं, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ई-सिगरेट पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इनमें मौजूद निकोटीन और अन्य हानिकारक रसायन शरीर पर गंभीर असर डाल सकते हैं। खासकर बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं के लिए इसका इस्तेमाल अधिक जोखिम भरा माना जाता है। आइए जानते हैं कि WHO के अनुसार ई-सिगरेट से जुड़े क्या-क्या नुकसान हैं और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
ई-सिगरेट एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जो एक विशेष लिक्विड को गर्म करके एरोसोल (Aerosol) बनाती है। इस लिक्विड में निकोटीन हो भी सकता है और नहीं भी, लेकिन इसमें फ्लेवर, केमिकल्स और अन्य ऐसे पदार्थ हो सकते हैं। इस डिवाइस से निकलने वाले एरोसोल को सांस के जरिए अंदर लेने की प्रक्रिया को वेपिंग (Vaping) कहा जाता है।
WHO के अनुसार, अधिकांश ई-सिगरेट में निकोटीन होता है, जो नशे की लत लगाने वाला पदार्थ है। निकोटीन की वजह से बार-बार इसकी इच्छा हो सकती है और इसे छोड़ना मुश्किल हो सकता है।
WHO के अनुसार, बच्चों और किशोरों में निकोटीन का सेवन मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकता है। इससे सीखने की क्षमता, याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।
WHO के अनुसार, ई-सिगरेट से निकलने वाले एरोसोल में ऐसे पदार्थ हो सकते हैं, जो हृदय और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं। इनमें कुछ ऐसे रसायन भी पाए जा सकते हैं, जो कैंसर का जोखिम बढ़ाने वाले माने जाते हैं।
WHO के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान निकोटीन का संपर्क भ्रूण के विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को ई-सिगरेट के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी जाती है।
WHO के अनुसार, जो किशोर पहले धूम्रपान नहीं करते, उनमें ई-सिगरेट का इस्तेमाल बाद में सामान्य सिगरेट पीने की संभावना बढ़ा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से लिखा गया है। यह डॉक्टर की सलाह या उपचार का विकल्प नहीं है।