Kidney Stone Pain in Summer Urologist Tips: मई-जून की गर्मी में क्यों बढ़ जाता है किडनी स्टोन का दर्द? यूरोलॉजिस्ट से जानें साइलेंट डिहाइड्रेशन का सच और पानी पीने का सही नियम।
Kidney Stone in Summer: मई-जून की तपती गर्मी अपने साथ सिर्फ पसीना और थकान ही नहीं लाती, बल्कि अस्पतालों के यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में अचानक एक खास तरह के मरीजों की कतार बढ़ा देती है। ये वो लोग होते हैं जो पीठ और पेट के निचले हिस्से में उठने वाले किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) के असहनीय दर्द से तड़प रहे होते हैं। अक्सर लोग मानते हैं कि पथरी रातों-रात बन गई, लेकिन यूरोलॉजिस्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे गर्मी के मौसम में होने वाला साइलेंट डिहाइड्रेशन (Silent Dehydration) है, जो धीरे-धीरे शरीर के भीतर इस गंभीर बीमारी को जन्म देता है।
यूरोलॉजिस्ट और एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. नवीन कुमार बताते हैं, "हर साल गर्मी की शुरुआत होते ही यूरोलॉजी के मामलों में अचानक उछाल देखा जाता है। कई मरीज सोचते हैं कि किडनी स्टोन अचानक विकसित हो गया, लेकिन असल में यह स्थिति लंबे समय तक बार-बार होने वाले डिहाइड्रेशन और पानी पीने की खराब आदतों के कारण धीरे-धीरे बनती है।"
जब बाहर का तापमान 40 डिग्री के पार जाता है, तो हमारे शरीर से पसीने के रूप में लगातार पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकलते हैं। कई बार हमें अहसास भी नहीं होता और शरीर अंदर से सूखने लगता है। इसी स्थिति को डॉक्टर्स साइलेंट डिहाइड्रेशन कहते हैं। जब शरीर में पानी का स्तर बहुत कम हो जाता है, तो किडनियां यूरिन (पेशाब) को फिल्टर करने के लिए कम पानी का इस्तेमाल कर पाती हैं। नतीजतन, यूरिन गाढ़ा (Concentrated) और गहरे पीले रंग का होने लगता है।
यूरिन में कैल्शियम, ऑक्सालेट और यूरिक एसिड जैसे कई मिनरल्स होते हैं। सामान्य स्थिति में पानी इन्हें घोलकर बाहर निकाल देता है। लेकिन पानी की भारी कमी के कारण ये मिनरल्स आपस में चिपककर छोटे-छोटे 'क्रिस्टल' बनाने लगते हैं। जब ये क्रिस्टल तेजी से बढ़कर पथरी का रूप लेते हैं और यूरिनरी ट्रैक्ट (पेशाब की नली) में खिसकते हैं, तो नली ब्लॉक हो जाती है और अचानक तेज दर्द उठता है।
डॉ. नवीन कुमार सलाह देते हैं कि किडनी को पूरी तरह स्वस्थ रखने और पथरी से बचने के लिए मरीजों को इतना पानी जरूर पीना चाहिए जिससे उनका शरीर रोजाना कम से कम 2 लीटर यूरिन पास करे।
सामान्य गाइडलाइन: मई-जून के महीनों में एक वयस्क को दिनभर में कम से कम 3.5 से 4 लीटर (लगभग 14-16 गिलास) तरल पदार्थ लेना अनिवार्य है।
आउटडोर काम करने वालों के लिए: जो लोग धूप में ज्यादा समय बिताते हैं या भारी शारीरिक मेहनत करते हैं, उन्हें 4.5 लीटर तक पानी पीना चाहिए।
हाइड्रेशन चेक करने का गोल्डन रूल: डॉक्टरों के मुताबिक, प्यास लगने का इंतजार न करें। अगर आपके यूरिन का रंग साफ या हल्का पारदर्शी है, तो आप पूरी तरह हाइड्रेटेड हैं। अगर यह गहरा पीला या अंबर रंग का है, तो समझें कि आपकी किडनी खतरे में है।
डॉक्टर बताते हैं कि गर्मी से बचने के लिए लोग अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस या अत्यधिक चाय-कॉफी का सहारा लेते हैं, जो शरीर को और ज्यादा डिहाइड्रेट करते हैं। इसके अलावा, बिना डॉक्टरी सलाह के रोज-रोज ओआरएस (ORS) पीना भी नुकसानदायक हो सकता है। ओआरएस में सोडियम (नमक) होता है, और शरीर में सोडियम की अधिक मात्रा यूरिन में कैल्शियम के स्तर को बढ़ा देती है, जिससे पथरी बनने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।
सादे पानी के अलावा नींबू पानी (नींबू में मौजूद साइट्रेट क्रिस्टल्स को चिपकने से रोकता है), नारियल पानी और छाछ जैसे प्राकृतिक विकल्पों को अपने रूटीन में शामिल कर सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।