
Winter Skin Disease: सर्दी का मौसम शुरू होता नहीं है कि स्किन की प्रॉब्लम तो जैसे सर्दी की शादी के दहेज में आई हो। ऐसे निकलकर सामने आती है कि किसी को खुजली होती है, तो किसी को डैंड्रफ हो जाता है, किसी की स्किन पर चकत्ते बनने लग जाते हैं, तो किसी की त्वचा ही गलने लग जाती है। इन्हीं बीमारियों में से एक है हाथ-पैरों की उंगलियों का लाल होकर सूज जाना। सर्दी के मौसम में आपने बहुत सारे लोगों को इस समस्या के साथ देखा होगा। कोई हल्दी का लेप लगाकर तो कोई हल्दी-चाय के पानी से इसको कम करने की कोशिश करता हुआ आपको हर घर में कोई न कोई दिखाई दे ही जाएगा।
अब बात यह आती है कि है तो सिर्फ उंगलियों पर सूजन और उसका कारण भी हम सब बस एक ही मान लेते हैं कि सर्दी के कारण ऐसा हो रहा है। ज्यादातर लोग कह देते हैं कि इसको तो ठंड से एलर्जी है, हर बार होता है, सर्दियों में सर्दी खत्म होने के साथ खत्म हो जाएगा। ऐसी ही त्वचा की एक समस्या है चिलब्लेन्स जिसे आम भाषा में बिवाई कहते हैं। आइए डॉ. आदित्य सोनी से जानते हैं कि चिलब्लेन्स क्या है और सर्दियों में यह ज्यादा क्यों बढ़ता है? इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
सर्दियों में ठंड के कारण उंगलियों में जब सूजन आ जाती है, तो ऐसा महसूस होता है जैसे उंगलियां जम गई हों, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता है। ठंड के कारण उंगलियों में सूजन आती है और रक्त वाहिकाएं सर्दी में सिकुड़ जाती हैं, इससे हमारा रक्त संचार बाधित हो जाता है और उंगलियों में दर्द के साथ कभी-कभी खुजली भी चलती है। चिलब्लेन्स को आसान शब्दों में 'पेर्नियोसिस' भी कहते हैं।
सर्दियों में जब हमारा शरीर ठंड के संपर्क में आता है, तो त्वचा के बिल्कुल पास यानी त्वचा के नीचे जो छोटी रक्त वाहिकाएं होती हैं, वे ज्यादा ठंड के कारण सिकुड़ जाती हैं, जिससे यह समस्या उत्पन्न होती है। अब सर्दियों में हम एक सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि जब ज्यादा ठंड लगती है, तो एकदम से गर्म जगह पर जाते हैं। इससे होता यह है कि पहले से इतनी ज्यादा ठंड और फिर एकदम से जब हीटर या अन्य उपकरणों के पास जाते हैं, तो रक्त वाहिकाएं एकदम से फैलने की कोशिश करती हैं। जिसके कारण ऊतकों में लालिमा और सूजन की स्थिति बन जाती है। इसके अलावा सर्दियों में टाइट जूते और मोजे भी इसका एक कारण हैं।
सर्दियों का मौसम आते ही जिन लोगों को उंगलियों में सूजन की समस्या होती है, वे सभी अपने स्तर पर प्रबंधन शुरू कर देते हैं। आइए अब डॉक्टर से जानते हैं कि किन बातों का ध्यान रखकर हम इससे बच सकते हैं: