दुनियाभर में सबसे ज्यादा मौतें सड़क दुर्घटनाओं की वजह से होती है। तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी इसकी बड़ी वजह होती है। लेकिन ऐसी ही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए देश की एक सड़क ऐसी है जहां वाहन नहीं बल्कि सड़क हॉर्न बजाती है।
दुनिया में सबसे ज्यादातर मौतों का कारण रोड एक्सीडेंट्स ही हैं। तेज रफ्तार हो या फिर ट्रैफिक नियमों की अनदेखी ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से लगातार सड़क हादसों में बढ़ोतरी हो रही है। यही वजह है कि इन हादसों पर लगाम लगाने के लिए सरकारों की ओर से भी समय-समय पर कदम उठाए जाते हैं। सड़क दुर्घटनाओं में कमी के लिए हॉर्न को भी काफी हद तक जिम्मेदार माना जाता है। अगर समय रहते वाहन एक दूसरे को हॉर्न दें तो कुछ हादसों को रोका जा सकता है। भारत में एक सड़क ऐसी है जहां वाहन नहीं बल्कि सड़क ही हॉर्न बजाती है।
पहाड़ी क्षेत्रों या फिर घाटियों में एक्सीडेंट होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। इन घाटियों की सड़कें घुमावदार होती हैं। इससे अकसर दो गाड़ियों में भिड़ंत हो जाती है। लेकिन ऐसी ही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक खास तकनीक के साथ सड़क तैयार की गई है, जो वाहनों को करीब आते ही खुद ब खुद हॉर्न बजाती है।
भारत में भी सड़क दुर्घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। घुमावदार मोड़ की वजह से ड्राइवर को पता नहीं चल पाता कि सामने से कोई और गाड़ी आ रही है और इसी में टक्कर हो जाती है।
यह भी पढ़ें - असम की खास सुनहरी चाय ने बिक्री को लेकर बनाया रिकॉर्ड, जानिए इसकी खासियत
घाटियों में होने वाले इन एक्सीडेंट्स को रोकने के लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम और लिओ बर्नेट ने एक यूनिक आइडिया को डेवलप किया। इसमें गाड़ी के हॉर्न बजाने की जगह सड़क को ही हॉर्न बजाने का सिस्टम डेवलप किया गया है।
इस तरह काम करती है तकनीक
देश में जम्मू-कश्मीर को जोड़ने वाले एनएच 1 पर सबसे पहले इस तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इन घाटियों में रास्ते बेहद घुमावदार हैं।
यही वजह है कि, दूसरे वाहन के बारे में पहले से पता नहीं चल पाता। मोड़ के चक्कर में कई बार वाहन चालक हॉर्न बजाना भूल जाता है। ऐसे में इस सड़क के टर्न या मोड़ पर स्मार्ट लाइफ पोल्स लगाए जाएंगे।
जैसे ही कोई गाड़ी इन पोल्स के पास पहुंचेगी, सड़क से आवाज आने लगेगी। इससे दूसरी तरफ के ड्राइवर भी सचेत हो जाएंगे। खास बात यह है इस तकनीक के चलते इस इलाके में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी दर्ज की गई है।
सरकार अब इस सिस्टम को बाकि अन्य जगहों पर भी इमप्लांट करने की प्लानिंग कर रही है। इसमें रोहतांग पास से लेकर लेह मनाली हाईवे भी शामिल है।
यह भी पढ़ें - ऐसा देश, जहां पैदा होते ही 1 साल का हो जाता है बच्चा