इंदौर

‘फोटोकॉपी को नहीं माना जाएगा सबूत’, 150 करोड़ के घोटाले पर MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

MP News: इंदौर के बहुचर्चित 150 करोड़ के सीवरेज घोटाले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने फोटोकॉपी दस्तावेजों को सबूत मानने से इनकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।
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Feb 01, 2026
150 crore indore sewerage scam high court rejected photocopy as evidence mp news
high court rejected photocopy as evidence (फोटो- Patrika.com)

MP News: 2 साल पहले सामने आए करोड़ों रुपए के इंदौर के सीवरेज घोटाले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में पेश की गई फोटोकॉपी को सबूत मानने के फैसले को रद्द कर दिया है। जस्टिस गजेंद्रसिंह की कोर्ट ने साफ कहा है कि कानून की अनिवार्य शर्ते पूरी किए बिना फोटोकॉपी दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

ये है पूरा मामला

अभिभाषक विवेक दलाल ने बताया, 2024 में नगर निगम ने 150 करोड़ के कथित घोटाले में अलग-अलग पांच से ज्यादा एफआइआर करवाई थी। निगम के ही कार्यपालन यंत्री अभय राठौर सहित अन्य को आरोपित बनाया गया था।

इस घोटाले से जुड़े 17 मामलों में ट्रायल कोर्ट में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य धाराओं में चालान के साथ 31 जुलाई 2025 को घोटाले से जुड़े दस्तावेजों की फोटोकॉपी दी गई थी। कोर्ट में एक आवेदन पुलिस की ओर से लगाया गया था, जिसमें कहा गया था कि केस से जुड़े मूल दस्तावेज नगर निगम के आधिपत्य में थे जो गुम हो गए है। इनके मिलने की भी संभावना नहीं है। फोटो कॉपी को ही सबूत माना जाए।

दस्तावेज गुम होने का दावा पर्याप्त नहीं

कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी भी दस्तावेज को सेकंडरी एविडेनस मानने के लिए यह साबित करना जरुरी है कि फोटोकॉपी मूल दस्तावेज से बनाई गई हो, फोटोकॉपी का मिलान मूल दस्तावेज से किया गया हो, केवल मूल दस्तावेज के गुम होने का दावा पर्याप्त नहीं है।

एक्सपर्ट व्यू… बगैर सबूत नहीं चल सकता केस

वरिष्ठ अभिभाषक विवेक सिंह के मुताबिक साक्ष्य अधिनियम में केस चलाने के लिए साक्ष्य पेश करने के लिए नियम तय हैं। धोखाधड़ी और ऐसे गंभीर मामलों में मूल दस्तावेज जिन्हें प्राथमिक साक्ष्य कहा जाता है, कोर्ट में पेश करना जरूरी है। यदि किसी दस्तावेज को पेश नहीं किया जा सकता है तो उसकी की फोटोकॉपी जिन्हें द्वितीयक साक्ष्य (सेकंडरी एविडेशन) कहा जाता है वो पेश किए जाते हैं, लेकिन उसकी भी प्रक्रिया है। सुनवाई के दौरान मूल दस्तावेज को पेश करना ही होगा। यदि वो पेश नहीं किए जाते हैं तो उस स्थिति में ये सिद्ध किस तरह से किया जाएगा कि, घोटाला हुआ है। दस्तावेज गायब होने की दशा दशा में केस चलाने का आधार ही नहीं रहता है। (MP News)

Updated on:
01 Feb 2026 03:54 am
Published on:
01 Feb 2026 03:54 am