
Indore-Dahod New Rail Project: एमपी में करीब चार दशक पहले शुरू हुई इंदौर-दाहोद नई रेल परियोजना आज भी मंजिल से कोसो दूर है। रेलवे भले ही अक्टूबर तक धार तक ट्रेन संचालन शुरू करने का दावा कर रहा हो, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण टीही-धार टनल का काम दिसंबर से पहले होता नजर नहीं आ रहा है। दूसरी ओर खरमोर अभयारण्य से जुड़े पर्यावरणीय व जमीन अधिग्रहण के मामले के साथ कई स्थानों पर अधूरे पुलों के कारण परियोजना की रफ्तार लगातार धीमी बनी हुई है।
700 करोड़ से शुरू हुई इस परियोजना की अनुमानित लागत अब 9 हजार करोड़ रुपए हो चुकी है। इंदौर-दाहोद रेल परियोजना की घोषणा पहली बार वर्ष 1986 में हुई थी। इसके बाद वर्ष 2007-08 के रेल बजट में इसे मंजूरी मिली और 2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने झाबुआ में इसका शिलान्यास किया था। करीब दो दशक बाद भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी है और लागत भी लगातार बढ़ती गई है।
फिलहाल इंदौर से राऊ तक रेल लाइन तैयार है और इस खंड में ट्रेन संचालन हो रहा है। वहीं पीथमपुर से धार के बीच ट्रायल भी किया जा चुका है। हालांकि इंदौर-धार के बीच बन रही सुरंग का काम पूरा नहीं होने से दोनों हिस्सों की कनेक्टिविटी अभी नहीं हो सकी है।
कुल लंबाई : 204.76 किलोमीटर
तैयार खंड : इंदौर-टीही (21 किमी) और दाहोद-कठवाड़ा (11.30 किमी)
वर्तमान कार्य : टीही-धार के बीच टनल निर्माण और शेष हिस्सों में ट्रैक, पुल तथा अन्य निर्माण कार्य जारी हैं।
बजट : शुरुआत 700 करोड़ के लगभंग, अब 9 हजार करोड़ पहुंचने का अनुमान।
रेलवे ने धार से तिरला स्टेशन तक निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। इस सेक्शन में ट्रैक और अन्य निर्माण कार्य जारी हैं, लेकिन काम की गति अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची है।
इस खंड को फरवरी 2027 तक पूरा करने की योजना है। हालांकि यहां कुछ बड़े इंजीनियरिंग कार्य अभी बाकी हैं। इसके अलावा कुछ स्थानों पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है, जिससे निर्माण प्रभावित हो रहा है।
इस सेक्शन के लिए रेलवे ने मार्च 2028 का लक्ष्य रखा है। सबसे बड़ी बाधा खरमोर अभयारण्य क्षेत्र से रेल लाइन गुजरने का मुद्दा है। पर्यावरणीय स्वीकृतियों और अंतिम निर्णय के अभाव में इस हिस्से में निर्माण की रफ्तार धीमी बनी हुई है।
रेलवे ने इस सेक्शन को मार्च 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यहां सुरंग सहित कई बड़े निर्माण कार्य अभी शुरू होने या पूरे होने बाकी हैं। इसी कारण इस हिस्से में परियोजना की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी है।