
इंदौर दाहोद रेल लाइन परियोजना (Photo Source: Western Railway X हैंडल)
Indore news: एमपी में इंदौर से धार ट्रेन चलने की उम्मीद जागी जरूर है, लेकिन रास्ते में टनल अब भी सबसे बड़ी बाधा बन गई है। धार तक ट्रैक का बड़ा हिस्सा तैयार है, मगर टनल में करीब 900 मीटर ट्रैक बिछाने और भीतर इलेक्ट्रिफिकेशन समेत कई काम बाकी हैं। ऐसे में सितंबर तक ट्रेन चलाने का लक्ष्य खिसकता नजर आ रहा है। अधिकारियों की मौजूदा रफ्तार के हिसाब से पहले टनल का काम पूरा होगा, फिर निरीक्षण और सीआरएस की प्रक्रिया होगी। यानी इंदौर-धार ट्रेन के लिए यात्रियों को नए साल तक इंतजार करना पड़ सकता है।
दरअसल, इंदौर दाहोद रेल लाइन परियोजना में इंदौर से टीही ओर पीथमपुर से धार तक अधिकांश काम पूरा हो चुका है। इस हिस्से में एक महत्वपूर्ण टीही टनल का काम चल रहा है। टनल के आगे धार तक रेलवे लाइन और अन्य प्रमुख काम लगभग पूरे हो चुके हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ी चुनौती टनल के अंदर ट्रैक और इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा करना है।
टीही टनल हिस्से में करीब 2013 मीटर तक ट्रैक बिछाया जा चुका है, 900 मीटर बाकी है। अधिकारियों का कहना है कि रोजाना करीब 50 मीटर ट्रैक बिछाने का लक्ष्य लेकर काम किया जा रहा है। इस हिसाब से भी यहां ट्रैक बिछाने में कम से कम एक महीने का समय लग सकता है। ट्रैक पूरा होने के बाद इलेक्ट्रिफिकेशन, निरीक्षण और अन्य तकनीकी काम किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार कुछ काम साथ-साथ चल रहे हैं, ताकि टनल का काम पूरा होते ही आगे की प्रक्रिया में ज्यादा समय न लगे। इंदौर से धार के बीच पूरा सेक्शन तैयार होने के बाद सीधे सीआरएस निरीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद सुरक्षा संबंधी मंजूरी मिलने पर यात्री ट्रेन चलाने का रास्ता खुल जाएगा। रेलवे का लक्ष्य पहले सितंबर तक काम पूरा करने का था, लेकिन मौजूदा स्थिति में यह लक्ष्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा है।
इंदौर से धार के बीच ट्रेन शुरू होने की उम्मीद भले ही कुछ महीनों में हो, लेकिन धार से दाहोद तक सफर के लिए यात्रियों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। दाहोद की तरफ कटवाड़ा स्टेशन तक काम पूरा हो चुका है, लेकिन बीच में तिरला क्षेत्र और अन्य हिस्सों में काम अटका हुआ है। तिरला क्षेत्र में पहले ब्रिज बनाया जाना प्रस्तावित था, लेकिन अब यहां टनल बनाने का निर्णय लिया गया है। इससे काम की रफ्तार प्रभावित हुई है।
इसके अलावा जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी चल रही है। खरमोर अभयारण्य के बाईपास को लेकर भी काम आगे बढऩा बाकी है। यानी इंदौर से धार तक ट्रेन का सपना जल्द पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन धार से दाहोद तक पूरी रेल लाइन पर ट्रेन दौडऩे के लिए करीब दो से तीन साल और इंतजार करना पड़ सकता है।
Updated on:
15 Sept 2026 02:43 pm
Published on:
15 Sept 2026 02:42 pm
