
Indian Railways:एमपी में इंदौर के यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय रेलवे अब इंदौर के दो प्रमुख रेल मार्गों पर भी स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली 'कवच' लागू करने की तैयारी में है। इंदौर-उज्जैन और इंदौर-फतेहाबाद चंद्रावतीगंज मार्ग पर कवच प्रणाली लगाने की मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल नागदा सेक्शन पर इसका काम चल रहा है। वहां का कार्य पूरा होने के बाद इन दोनों मार्गों के लिए डीपीआर तैयार कर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कवच लागू होने के बाद इन रूटों पर रेल संचालन पहले से अधिक सुरक्षित हो जाएगा और मानवीय भूल से होने वाली दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार मंडल में कवच प्रणाली को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में इंदौर के दोनों महत्वपूर्ण मार्गों को भी शामिल किया गया है। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि जिन मार्गों पर मंजूरी मिल चुकी है, वहां आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद काम शुरू किया जाएगा।
कवच प्रणाली से दो ट्रेनों की टक्कर की आशंका लगभग समाप्त हो जाती है। गति सीमा वाले क्षेत्रों में यह ट्रेन की स्पीड स्वत: नियंत्रित करती है। घने कोहरे या खराब मौसम में भी लोको पायलट को केबिन में ही सिग्नल की जानकारी मिलती रहती है। इससे रेल संचालन अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनता है। रेलवे देशभर में चरणबद्ध तरीके से कवच का विस्तार कर रहा है और इसके उन्नत संस्करण कवच 4.0 का सफल परीक्षण भी किया जा चुका है।
कवच भारतीय रेलवे द्वारा विकसित स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी ) प्रणाली है। यदि लोको पायलट लाल सिग्नल पार कर देता है या किसी कारण से समय पर ब्रेक नहीं लगा पाता है तो यह प्रणाली स्वत: ट्रेन में ब्रेक लगाकर उसे रोक देती है। इससे आमने-सामने की टक्कर, पीछे से होने वाली भिड़ंत और सिग्नल पासिंग जैसी गंभीर दुर्घटनाओं की संभावना काफी कम हो जाती है।
कवच प्रणाली में इंजन पर विशेष डिवाइस लगाया जाता है, जबकि ट्रैक पर निर्धारित दूरी पर टैग लगाए जाते हैं जो ट्रेन की सटीक लोकेशन बताते हैं। ऑह्रिश्वटकल फाइबर नेटवर्क, रेडियो संचार और कंट्रोल सिस्टम के जरिए ट्रेन, स्टेशन और कंट्रोल रूम लगातार एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। यदि कोई खतरा महसूस होता है तो सिस्टम तत्काल अलर्ट देता है और जरूरत पडऩे पर ट्रेन को स्वत: रोक देता है।