Hernia Surgery Revolution : डॉक्टर बोले- इस तकनीक को पेटेंट नहीं कराऊंगा। ज्यादा डॉक्टर दे सकेंगे मरीजों को लाभ। राहत दे रही तकनीक, 200 सफल सर्जरियां हो चुकीं।
Hernia Surgery Revolution :मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर में हर्निया के महंगे ऑपरेशन का बोझ अब मरीजों पर नहीं पड़ेगा। सर्जरी में क्त्रस् 24 हजार तक लगने वाले स्टैपलर की बजाय 10-15 रुपए के द्रव्य व टांकों से ऑपरेशन हो रहे हैं। इस नई तकनीक को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्रो. अरविंद शुक्ला ने विकसित की है। इससे खर्च घटा। मरीजों को दर्द से राहत मिली और वे जल्द रिकवर हो रहे हैं। डॉ. शुक्ला ने कहा, पेटेंट नहीं कराऊंगा, ताकि ज्यादा डॉक्टर इससे मरीजों को राहत दे सकें। शेषञ्चपेज ०९
उनकी इस तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है। साउथ कोरिया में इंटरनेशनल लेप्रोस्कोपिक कॉन्फ्रेंस में उन्हें बेस्ट रिसर्च पेपर अवॉर्ड दिया गया। 15 अगस्त को कलेक्टर आशीष सिंह ने भी उन्हें इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया।
नई तकनीक से अस्पताल में एक ही दिन में 10 मरीजों का सफल सर्जरी की गई। इस तकनीक से ऑपरेशन करवाने वाले मरीजों ने बताया, उन्हें स्टैपलर के मुकाबले कम दर्द हुआ। जल्दी रिकवरी हुई।
डॉ. शुक्ला ने इस तकनीक को पेटेंट कराने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि यह तकनीक सभी डॉक्टरों के लिए उपलब्ध होनी चाहिए ताकि अधिक से अधिक मरीजों को फायदा हो।
एम.वाय.एच अस्पताल में अब तक इस तकनीक से 200 से अधिक मरीजों की सर्जरी की जा चुकी है। डॉ. शुक्ला ने बताया, पारंपरिक पद्धति में हर्निया निकालने के बाद जाली (मेश) को टैकर या स्टैपलर से फिक्स करते थे। इसकी लागत २० से २४ हजार रुपए आती थी। नई पद्धति में एनब्ल्यूटाएल टू सायनोएक्रालेट नामक केमिकल सीरिंज की मदद से इस्तेमाल करते हैं। इससे मेश सुरक्षित रूप से फिक्स हो जाता है और खर्च केवल 15 रुपए आ रहा है। वहीं, पेट के अन्य प्रकार के हार्निया में स्प्रिंग की बजाय टांकों से जाली फिक्स की जाती है। इसमें भी कुल खर्च 165 रुपए तक हो रहे हैं।