
New Tax Year System: नया आयकर कानून लागू होने और असेसमेंट ईयर की जगह टैक्स ईयर की व्यवस्था शुरू होने के बाद देशभर के करदाताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उन्हें अब एक ही आय के लिए दो बार आयकर रिटर्न दाखिल करना पड़ेगा? आयकर विभाग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि एक आय के लिए एक ही रिटर्न भरना होगा। नया टैक्स ईयर सिस्टम आने से केवल नाम और प्रक्रिया में कुछ बदलाव हुआ है, लेकिन करदाताओं पर दोहरी रिटर्न फाइलिंग का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। विभाग ने अपनी गाइडलाइन 'कर सेतु' में बताया है कि 1 अप्रेल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच हुई आय के लिए रिटर्न पहले की तरह असेसमेंट ईयर 2026-27 के तहत ही दाखिल किया जाएगा। यानी इस आय के लिए कोई अतिरिक्त रिटर्न नहीं भरना होगा।
1 अप्रेल से नया आयकर कानून लागू होने के साथ असेसमेंट ईयर की जगह टैक्स ईयर शब्द का इस्तेमाल शुरू हो गया है। इस वजह से कई करदाताओं को लगा, वर्ष 2026-27 में उन्हें एक रिटर्न असेसमेंट ईयर और दूसरा टैक्स ईयर के तहत दाखिल करना पड़ेगा। आयकर विभाग ने साफ किया, ऐसा नहीं होगा। नई व्यवस्था में भी रिटर्न उसी आय वर्ष के खत्म होने के बाद भरा जाएगा, जैसा होता आया है।
यदि आपने 1 अप्रेल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच आय अर्जित की है, तो उसका रिटर्न असेसमेंट ईयर 2026-27 के तहत वर्ष 2026 में दाखिल करना होगा। वहीं 1 अपेल 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच अर्जित आय के लिए रिटर्न टैक्स ईयर 2026-27 के तहत वर्ष 2027 में दाखिल किया जाएगा।
दरअसल अब तक आयकर विभाग की ओर से व्यवस्था कि जिस अवधि में इनकम होती थी, उसे फाइनेंशियल ईयर कहा जाता था। वहीं उसके अगले वर्ष को असेसमेंट ईयर कहना होता था। जैसे 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक की आय वित्त वर्ष 2025-26 में मानी जाती थी। वहीं इस आय का रिटर्न असेसमेंट ईयर 2026-27 में दाखिल किया जाता था। लेकिन अब नये कानून में असेसमेंट ईयर के बजाय टैक्स ईयर शब्द का इस्तेमाल किया गया है। ताकि करदाताओं को आसानी हो सके।
आयकर विभाग के मुताबिक असेसमेंट ईयर शब्द के कारण आम करदाता में अक्सर भ्रम की स्थिति देखी जाती थी। कई लोग तो इसे समझ ही नहीं पा रहे थे कि वे रिटर्न इनकम ईयर का भर रहे हैं या अगले वर्ष का। ऐसे में करदाता को यह समझने में आसानी हो कि वह किस साल का ITR भर रहा है, यही सोचकर सरकारी स्तर पर यह बदलाव किया गया है।
मामले में भोपाल के सीए और अकाउंटेंट अनिमेष कर बताते हैं कि इसका बड़ा फायदा उन करदाताओं को मिलेगा जो पहली बार रिटर्न भरने वाले हैं, नौकरीपेशा हैं या फिर छोटे व्यापारी। दरअसल नये नियम से आयकर की प्रक्रिया इन्हें आसानी से समझ आएगी। इससे रिटर्न दाखिल करने में होने वाली सामान्य गलतियों की संभावना भी कम हो सकती हैं।
- एक आय के लिए एक ही ITR File करना होगा।
- केवल असेसमेंट ईयर शब्द बदला है इसे अब Tax Year कहा जा रहा है।
- ITR फाइलिंग की समय सीमा और मूल प्रक्रिया में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।