उद्योग जगत

बिजली, रियल एस्टेट, पेट्रोलियम, शराब भी GST के दायरे में आएं: CII

सीआईआई के नवनिर्वाचित अध्यक्ष का कहना है कि जीएसटी को तर्कसंगक बनाया गया है, लेकिन अभी भी इसमें बहुत संभावना है।

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Apr 12, 2018

नई दिल्ली। देश के प्रमुख उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने गुरुवार को बिजली, रियल एस्टेट, पेट्रोलियम और शराब को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग की। साथ ही सीआईआई ने सभी प्रोत्साहनों को समाप्त कर कॉर्पोरेट कर को कम कर 18 फीसदी करने की मांग की है। सीआईआई के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राकेश भारती मित्तल ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद पहली बार संवाददातााओं से चर्चा करते हुए कहा कि जीएसटी को तर्कसंगक बनाया गया है, लेकिन अभी भी इसमें बहुत संभावना है। उन्होंने पेट्रोलियम, बिजली, शराब और रियल एस्टेट को इसके दायरे में लाने की मांग करते हुए कहा कि जीएसटी के लिए एक दर रखना मुमकिन नहीं है। इसके लिए दो या तीन दरें रहनी चाहिए।

आम लोगों से आयकर रिटर्न भरने की अपील

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उन्होंने कहा कि जीएसटी से कर आधार बढ़ाने में मदद मिली है, लेकिन अभी भी करीब छह करोड़ लोग ही आयकर रिटर्न भर रहे हैं जिनमें से करीब आधा नौकरीपेशा लोग हैं। इसके मद्देनजर आम लोगों से भी आयकर रिटर्न भरने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि कर आधार बढ़ाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े देश में मात्र छह करोड़ करदाता होना उचित नहीं है।

कॉर्पोरेट आयकर की दर को एक समान करने की वकालत

मित्तल ने कंपनियों को मिल रहे सभी प्रोत्साहनों को समाप्त कर कॉर्पोरेट आयकर की दर को एक समान 18 फीसदी करने की पुरजोर वकालत करते हुए कहा कि अमरीका में इसको 33 फीसदी से कम कर सीधे 21 फीसदी कर दिया गया है। इसको देखते हुए भारत में भी कॉर्पोरेट कर को 18 फीसदी किया जा सकता है। सरकार के 250 करोड़ रुपए तक के कारोबार वाली कंपनियों को 25 फीसदी कॉर्पोरेट कर के दायरे में लाने को स्वागत योग्य बताते हुए उन्होंने कहा कि 99 फीसदी कंपनियां इसके दायरे में आ चुकी हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि कुछ कंपनियों को 10 वर्षाें तक विभिन्न प्रकार की छूट दी गई है जिसे एक झटके में समाप्त नहीं किया जा सकता। लेकिन, इनका उपाय करते हुए सरकार कॉर्पोरेट कर को कम कर 18 फीसदी करने की दिशा में बढ़ सकती है।

जीएसटी से कारोबार में बड़ा बदलाव आया: कोटक

इस मौके पर संगठन के नवनियुक्त मनोनीत अध्यक्ष उदय कोटक ने कहा कि जीएसटी के साथ ही ई-वे बिल से उद्योग और कारोबार में बहुत बड़ा बदलाव आया है। आने वाले दिनाों में इसका लाभ होगा। उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे सुधारों से अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने में मदद मिली है।

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Published on:
12 Apr 2018 07:42 pm
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