जयपुर

जयपुर में बरामद हुए नरमुंड मामले में 8 साल बाद बरी हुए पत्नी-साला और किराएदार, जलमहल की पहाड़ियों पर मिली थी हड्डियां

जयपुर के बहुचर्चित तेजप्रकाश शर्मा हत्याकांड में 8 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पत्नी, साले और किराएदार को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।

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Jun 13, 2026
Court order
फाइल फोटो: पत्रिका

Tej Prakash Sharma Murder Case Update: जयपुर जिला सेशन न्यायालय ने करीब 8 साल पुराने बहुचर्चित तेजप्रकाश शर्मा हत्याकांड मामले में पत्नी, साले और किराएदार को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए ठोस और आपस में जुड़ी हुई साक्ष्यों की कड़ी पेश करने में विफल रहा। इसके चलते सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए रिहा किया गया।

मामले के अनुसार गलता गेट थाने में दर्ज रिपोर्ट में हरीश कुमार शर्मा ने बताया था कि उनके भाई तेजप्रकाश शर्मा 14 जनवरी 2018 को घर से निकले थे और वापस नहीं लौटे। कुछ दिनों बाद 26 जनवरी 2018 को जलमहल की पहाड़ियों से एक नरमुंड और हड्डियां बरामद हुई थीं। पुलिस ने जांच के दौरान मृतक की पत्नी सीमा शर्मा, साले श्रीकान्त निर्मोही और किराएदार अभिषेक शर्मा को आरोपी बनाया था और हत्या का आरोप लगाया था।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं कुलदीप सिंह, वी.के. बाली और सोनल दाधीच ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और साक्ष्यों पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने अपने फैसले में कई अहम कमियों की ओर इशारा किया, जिनमें मेडिकल रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों में असंगति प्रमुख रही।

अदालत ने गिनाईं जांच में ये कमियां

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में जांच और साक्ष्यों के बीच गंभीर विसंगतियां पाई गईं। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार बरामद कंकाल लगभग एक महीने पुराना था, जबकि पुलिस द्वारा प्रस्तुत घटनाक्रम और समय-सीमा इस निष्कर्ष से मेल नहीं खाती थी। बरामदगी का समय और घटनास्थल के बीच की दूरी भी असंभव और काल्पनिक प्रतीत हुई, जिससे पूरी कहानी पर सवाल खड़े हो गए।

इसके अलावा रोजनामचे में घटना से जुड़ी तत्काल कोई प्रविष्टि नहीं की गई थी, जिससे जांच की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न हुआ। बरामद किए गए गमछे को भी सूखा हुआ दर्शाया गया जिसने घटनाक्रम को और अधिक संदिग्ध बना दिया।

डीएनए मिलान के लिए लिए गए नमूनों के संबंध में आरोपियों की लिखित सहमति रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं थी, जो एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक कमी मानी गई। साथ ही कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन भी आरोपियों की घटनास्थल पर मौजूदगी साबित करने में असफल रहे। इन्हीं सभी आधारों और साक्ष्यों की कमजोरी के चलते अदालत ने तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का निर्णय सुनाया।

Published on:
13 Jun 2026 08:45 am